अनिश्चित भविष्य व फॉलेन आउट की पीड़ा से परेशान हैं सरकारी कॉलेजों के अतिथि विद्वान
‘ अनेकों महिला और पुरुष अतिथि विद्वान अब तक काल के गाल में समा गए ‘
मोहन सरकार की अनदेखी से सरकारी कॉलेजों के अतिथि विद्वान दिनों-दिन सहायक प्राध्यापक, क्रीड़ा अधिकारी, ग्रंथपाल की नियमित भर्ती से फॉलेन आउट होते जा रहे हैं। शिवराज सरकार के बाद अब मोहन सरकार से अपने अधूरें भविष्य को सुरक्षित करने की चिंता इन उच्च शिक्षितों को नींद नहीं आने दे रही है। चुनाव से पहले बड़े – बड़े दावे किए जाते हैं, सरकार बनने के बाद इनकी तरफ ध्यान नहीं दिया जाता है।
वास्तव में जीवन का ढ़ाई दशक इन्होंने नाममात्र की कालखंड दर और डेली दिहाड़ी पर ही गुजार दिया है। हरियाणा नीति जैसी मध्य प्रदेश में अतिथि विद्वानों के लिए लागू करने की घोषणा उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने जनवरी 2026 के शुरुआती दिनों में की थी। जिसके बाद सात लोगों की कमेटी भी गठित कर दी गई। लेकिन कमेटी की रिपोर्ट वित्त विभाग की अनुमति के लिए अब तक वल्लभ भवन के अधिकारियों द्वारा नहीं भेजी गई है। वहीं वर्तमान में इन्हें दो हजार रुपए प्रति दिन के हिसाब से मानदेय दिया जाता है। जो दो से तीन महीने में 50 हजार रुपए अधिकतम रहता है, शेष में 25 से दिवसों से कम। जबकि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 11 सितंबर 2023 को इनके लिए शिवराज सरकार ने पंचायत बुलाई थी। जिसमें अन्य सुविधाएं जरूर मिली, लेकिन भविष्य सुरक्षित करने की बजाय दो हजार रुपए प्रति कार्य दिवस का आदेश अधिकारियों ने निकाल दिया। जिसके कारण इनको जब चाहे फॉलेन आउट कर दिया जाता है। जबकि अध्यापन कार्य के अलावा परीक्षा ड्यूटी, मूल्यांकन कार्य, एनएसएस, एनसीसी, प्रवेश , छात्रवृत्ति, आवास आदि गतिविधियों को इनके द्वारा सम्पन्न किया जाता है।
एमपी अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुरजीतसिंह भदौरिया व प्रदेश प्रवक्ता शंकरलाल खरवाडिया ने इस बारे में बताया है कि भविष्य सुरक्षा की उम्मीद में अतिथि विद्वान अधेड़ उम्र में जा रहे हैं। सरकार को हमारे बारे में भी विचार करना चाहिए। हमें बार-बार सरकार के नुमाइंदों से झूठें आश्वासन मिलते आए हैं। अनेकों महिला और पुरुष अतिथि विद्वान काल के गाल में समा गए हैं। उनका परिवार बगैर सरकारी मदद के जीवन गुजार रहा है। अब तो हमारे भविष्य के लिए हरियाणा जैसी पॉलिसी ( अतिथि प्राध्यापकों ) एमपी में लागू कर देना चाहिये।