4 मई 2026, रात 9:00 बजेजनादेश 2026: पश्चिम बंगाल, केरल, तामिलनाडु में खेला! असम और पुदुचेरी में यथास्थिति!
विशेष विश्लेषण | रिफ्रेश संस्करण – 4 मई 2026, रात 9:00 बजे
जनादेश 2026: पश्चिम बंगाल, केरल, तामिलनाडु में खेला! असम और पुदुचेरी में यथास्थिति!!
डॉ बालाराम परमार ‘हॅंसमुख’
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4 मई 2026 को पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों के अंतिम नतीजों ने देश की राजनीति का नक्शा पूरी तरह बदल दिया है। पश्चिम बंगाल, केरल और तामिलनाडु में ‘खेला’ हो गया — तीनों जगह सत्ता पलट गई। वहीं असम और पुदुचेरी के मतदाताओं ने यथास्थिति पर मुहर लगाई। इस जनादेश की सबसे बड़ी विशेषता है — तमिलनाडु में अभिनेता थलापति विजय की तमिलगा वेत्री कज़गम का धमाकेदार उभार, केरल में 40 साल बाद ‘रिवाज’ टूटना और कांग्रेस का राष्ट्रीय स्तर पर सिमटना।
पश्चिम बंगाल: 15 साल बाद ‘पोरिबोर्तन’ का पोरिबोर्तन
अंतिम नतीजा: NDA-165, TMC-112, लेफ्ट-कांग्रेस-14, अन्य-3 | कुल 294
2011 में 34 साल के वाम शासन को उखाड़ने वाली ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस इस बार खुद एंटी-इनकम्बेंसी की शिकार हो गई। NDA ने 165 सीटों के साथ पहली बार बंगाल में सरकार बना ली। यह केवल सत्ता-परिवर्तन नहीं, बंगाल की राजनीतिक संस्कृति का बदलाव है।
हार के पाँच ठोस कारण:
पहला: संदेशखाली काण्ड पर संवेदना में देरी। शाहजहाँ शेख की गिरफ्तारी में देरी ने ‘दीदी’ को ‘महिला-विरोधी’ के खांचे में डाल दिया।
दूसरा: शिक्षा घोटाला। 25,946 शिक्षकों की नौकरी जाना और ED की छापेमारी में ‘नकदी के पहाड़’ ने ‘माँ-माटी-मानुष’ को ‘माल-मलाई-माफिया’ बना दिया।
तीसरा: हिंसा बनी पहचान। ‘भय-मुक्त बंगाल’ के नारे पर जनता ने वोट किया। ‘खेला होबे’ दीदी पर ही भारी पड़ा।
चौथा: केंद्र की योजनाओं से टकराव। ‘स्वास्थ्य साथी’, ‘बांग्लार बाड़ी’ स्टीकर की राजनीति ने जमीनी नुकसान किया।
पाँचवाँ: परिवारवाद का शिकंजा। शुभेंदु अधिकारी के जाने के बाद ‘अभिषेक बनाम पुराने वफादार’ की लड़ाई ने संगठन तोड़ दिया।
अब NDA के सामने CAA लागू करने, उद्योग लाने और ‘सोनार बांग्ला’ का वादा निभाने की चुनौती है।
केरल: 40 साल बाद ‘खेला’, LDF की हैट्रिक का सपना टूटा
अंतिम नतीजा: UDF-78, LDF-59, NDA-3 | कुल 140
केरल ने इतिहास रच दिया। 1982 के बाद पहली बार सत्ता विरोधी लहर जीती। पिनराई विजयन की हैट्रिक का सपना टूट गया। UDF ने 78 सीटों के साथ वापसी की।
LDF क्यों हारी?
- ‘सोना तस्करी-लाइफ मिशन’ विवाद: मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुँचे आरोपों ने ‘पिनराई ब्रांड’ को दागदार किया।
- युवाओं की नाराजगी: PSC नियुक्तियों में देरी और संविदा कर्मियों का आंदोलन UDF के पक्ष में गया।
- UDF की एकजुटता: VD सतीशन और मुस्लिम लीग की केमिस्ट्री काम कर गई। कांग्रेस ने 21 से 45 सीटों तक छलांग लगाई।
- भाजपा का वोट ट्रांसफर: 3 सीट जीतने के बावजूद कई सीटों पर भाजपा का वोट UDF को ट्रांसफर हुआ, जिसने LDF को हराया।
केरल ने बता दिया — साक्षरता के साथ-साथ जवाबदेही भी चाहिए।
तमिलनाडु: विजय की TVK ने बिगाड़ा द्रविड़ दलों का खेल
अंतिम नतीजा: DMK+-89, AIADMK+-72, TVK-68, BJP-4, अन्य-1 | कुल 234
स्टालिन सरकार के 5 साल बाद तमिलनाडु त्रिशंकु हो गया। 10 साल बाद भी AIADMK-BJP सत्ता से दूर रही। सबसे बड़ा धमाका थलापति विजय की तमिलगा वेत्री कज़गम ने किया — पहली बार में ही 68 सीटें जीतकर किंगमेकर बन गई।
क्या हुआ?
- सनातन विवाद बैकफायर: उदयनिधि स्टालिन के बयान ने DMK का ग्रामीण आधार हिला दिया।
- भ्रष्टाचार और परिवारवाद: ‘कंपनी राज’ के आरोप और ‘अन्नामलाई ऑडियो’ ने DMK-AIADMK दोनों को नुकसान पहुँचाया।
- विजय फैक्टर: युवाओं, महिलाओं और पहली बार के वोटर्स ने TVK को ‘बदलाव’ मानकर वोट दिया। विजय ने 41 सीटें अकेले दम पर जीतीं।
- मोदी फैक्टर बेअसर: PM की 12 रैलियों के बावजूद BJP 4 पर सिमटी। तमिलनाडु ने ‘दिल्ली बनाम द्रविड़’ को नकार कर ‘विजय बनाम दोनों’ चुना।
अब सरकार बनाने की चाबी TVK के पास है।
असम: हिमंत का ‘डबल इंजन’ बरकरार
अंतिम नतीजा: NDA-84, कांग्रेस+AIUDF-36, अन्य-6 | कुल 126
असम ने 2021 दोहराया। हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में NDA ने 84 सीटों के साथ लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। ‘ओरुनोदोई’, CAA-NRC पर स्पष्ट स्टैंड और बाढ़ नियंत्रण ने कमाल किया। कांग्रेस-AIUDF टांय-टांय फिस हो गया।
पुदुचेरी: रंगासामी का जादू कायम
अंतिम नतीजा: AINRC+BJP-20, DMK+कांग्रेस-8, निर्दलीय-2 | कुल 30
CM एन. रंगासामी के नेतृत्व में NDA ने 20 सीटों के साथ सरकार बचा ली। कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला।
कांग्रेस: अस्तित्व का संकट गहराया
पाँच राज्यों में कांग्रेस कुल 54 सीटों पर सिमटी — केरल में 45, असम में 9, बाकी तीन राज्यों में शून्य। ‘भारत जोड़ो’ के बाद भी संगठन नहीं, ‘हाईकमान’ कन्फ्यूज, कार्यकर्ता भ्रमित। बंगाल में TMC से लड़े, तमिलनाडु में DMK के साथ, केरल में लेफ्ट से लड़े। विचारधारा का पता नहीं।
निष्कर्ष: 4 मई का संदेश
- बंगाल-केरल-तमिलनाडु ने बता दिया: सत्ता अहंकार नहीं, जवाबदेही माँगती है।
- असम-पुदुचेरी ने कहा: डिलीवरी हो तो जनता दोबारा मौका देती है।
- विजय की TVK ने दिखाया: चेहरा नया हो और बात साफ हो तो जनता 40 साल की राजनीति भी पलट देती है।
- कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी: क्षेत्रीय दल अब उसे ‘बोझ’ मान रहे हैं। 2029 से पहले संगठन-विचारधारा ठीक करनी होगी।
बंगाल और केरल में खेला हो गया, तमिलनाडु में नया खिलाड़ी आ गया। लोकतंत्र ने फिर साबित किया — ‘जनता ही जनार्दन है’।