12वीं पास विद्यार्थियों के लिए करियर मार्गदर्शन। कॉलेज नहीं, क्षमता चुनो

डॉ. बालाराम परमार ‘हँसमुख’

प्रिय विद्यार्थियों, 12वीं पास होने पर हार्दिक बधाई!

12 साल की पढ़ाई पूरी कर आप जीवन के सबसे बड़े चौराहे पर खड़े हैं। हर तरफ से आवाज आएगी — “बड़े नाम वाले कॉलेज में एडमिशन लो”। मेरा 34 वर्ष का शिक्षक एवं प्राचार्य का अनुभव कहता है – रुकिए। नामी कॉलेज और विश्वविद्यालय के पीछे मत भागिए। अपनी क्षमता पहचानो, फिर कॉलेज और विश्वविद्यालय चुनो।असली सवाल यह है: कॉलेज का नाम नहीं, आपका मन किस विषय में सुबह से शाम बिना थके डूब सकता है? जो विषय आपकी आँखों में चमक लाए, वही आपका भविष्य है। महँगे कॉलेज की भरपाई हो जाएगी, पर अरुचिकर विषय जिंदगी भर चैन की नींद नहीं सोने देगा।अभिभावकों से दो शब्द: बच्चे पर डॉक्टर-इंजीनियर बनने का बोझ मत डालिए। IIT, AIIMS और नामी-गिरामी संस्थान में प्रवेश का दबाव मत बनाइए। पूछिए – “बेटा, किस विषय में तेरी रुचि है?” जिस विषय को पढ़ने में नींद नहीं उड़ती थी, उसे देखा-देखी अपना भविष्य दाँव पर मत लगाइए। उसे आशीर्वाद देकर फीस कम, स्कोप ज्यादा वाले कॉलेज और विषय में दाखिला दिलवाइए।याद रहे: कॉलेज आपको डिग्री देगा, रुचिकर विषय आपको जिंदगी देगा।12 वर्ष की स्कूली शिक्षा रूपी ‘तपस्या’ पूर्ण होने पर अब जीवन का वह मोड़ है जहाँ ‘कौन-से कॉलेज’ से ज्यादा महत्वपूर्ण है -‘कौन-सा विषय मेरा स्वभाव है’। शिक्षक जीवन में मैंने IIT के टॉपर को डिप्रेशन में और छोटे कस्बे के कॉलेज के छात्र को ISRO में वैज्ञानिक बनते देखा है। अंतर केवल कॉलेज की दीवारों का नहीं, विषय के प्रति लगन और स्पष्ट दिशाबोध का होता है।अभिभावक अक्सर पूछते हैं: “बड़े शहरों में कोचिंग करने से मेरे बेटे का भविष्य उज्ज्वल हो जाएगा?” मेरा उत्तर होता है ,- “नौकरी तो 10वीं पास प्लंबर को भी मिलती है। प्रश्न यह है कि आप नौकरी ढूँढने वाली शिक्षा चाहते हैं या नौकरी पैदा करने वाली शिक्षा?” 12वीं पास छात्र को इस समय सही मार्गदर्शन मिल जाए तो वह चारों कर सकता है ,- नौकरी भी, उद्यम भी, शोध भी, सेवा भी।रुचिकर विषय चुनें, भीड़ से अलग दिखें। डिग्री के बाद अच्छे पैकेज वाली नौकरी का चयन महँगे कॉलेज से नहीं, आपकी ज्ञानार्जन क्षमता और कॉन्सेप्ट की पकड़ से होता है। 12वीं पास विद्यार्थियों, विश्वविद्यालय आपका ‘सरनेम’ बदल सकता है, पर ‘नेम’ आपको खुद बनाना है। ऑक्सफोर्ड का छात्र भी बेरोजगार हो सकता है, और जिला कॉलेज का छात्र भी ऑक्सफोर्ड में PhD कर सकता है। अंतर है – *जिज्ञासा, निरंतरता और कौशल का।महँगी कोचिंग से ज्यादा जरूरी है सीखने की जिज्ञासा। वह आप फ्री में पा सकते हैं, यदि आपको विश्वास है कि “मैं अपना करियर अपने दिल की आवाज से निर्धारित करूँगा।” अंतिम बात: 12 साल की स्कूली शिक्षा लेते हुए अभिभावक के दिल की सुनी। अब आप युवा हैं। दिल की सुनने का समय है। और यदि दिल कहता है ,-‘मैं यह विषय पढ़ूँगा’, तो यकीन मानिए, आपने विषय नहीं, भविष्य चुन लिया है।अंकसूची हाथ में लेकर पढ़ाई पूरी करने के लिए अपने आपको खोजो। भविष्य तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है।

💐शुभकामनाएँ 💐

डॉ. बालाराम परमार ‘हँसमुख’ 34 वर्ष का शिक्षक और आजीवन विद्यार्थी

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