समस्याओं के संकट से घिरी सरकार समाधान के उपायों से दूर।
रिंकेश बैरागी,
डॉक्टर्स की कमी से जुझता प्रदेश, कुपोषण के कलंक को सर पर लिए, प्यासी सूखी नदियों में भूजल स्तर के गहरे संकट में समाता हुआ जनता के साथ ठगी कर सड़क सुरक्षा के दावों को पछाड़ता हुआ, दुर्घटनाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए लगातार दुर्घटना में मौतों की संख्या में वृद्धी पाकर लोगों के जीवन को दुखमय बनाते हुए, सिंचाई की समस्या से ग्रसित परिवार पालन के लिए पलायन पर जाती जनता के पैरे के छाले नहीं देख पाता। नकली दवा, फर्जी डॉक्टर, एमडी ड्रग्स, नकली खाद्य सामग्री, लव जिहाद, मतांतरण, बालिकाओं के बलात्कार, महिलाओं की असुरक्षा, शिक्षा के नीजीकरण में संचालको की मनमानी, रोजगार की कमी और बच्चों को उचित स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा की कमी जैसी समस्याओं से प्रदेश जुझ रहा है और प्रदेश सरकार झुठे दावे के साथ विकास के वादों के आश्वासन से नागरिको को बहला रही है।
प्रदेश में जन समस्या दिन पर दिन उभरती जा रही है, लगभग हर क्षेत्र में जारी रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में समस्याओं के संकट में नंबर एक या दो पर बना हुआ है, और सरकार वादों से जनता को आश्वासन देकर समस्या से मुख मोड़ लेती है। हाल ही में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कुपोषण की अधिकता बताई साथ ही जनजातिय क्षेत्र में कुपोषण के प्रभाव को अधिक दर्शाया। ऐसी ही एक रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में भूजल संकट को भयावह बताकर केंद्रीय भूजल बोर्ड ने मालवा-निमाड़ में भूजल, पेयजल, के संकट को गंभीर बताया। इसी जल संकट के कारण प्रदेश में जनजाति क्षेत्रों में होने वाले पलायन से गांव खाली हो रहे हैं, लोग अपने घरो को छोड़ अन्य राज्यों में परिवार के पालन के लिए पलायन कर रहे हैं जिससे जनजाति समाज में स्वास्थ्य के गंभीर परिणाम आ रहे हैं, और उनके बच्चें शिक्षा से वंचित होकर अधिक मात्रा में कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टी से देखे तो प्रदेश में चिकित्सको की कमी भी है, और दुर्घटनाओं की दृष्टी से भी प्रदेश अव्वल है।विशेषज्ञों के अनुसार भूजल का दोहन के कारण पेयजल और कृषि दोनों के लिए गंभीर संकट पैदा हो जाएगा क्योंकि भूजल पुनर्भरण में 0.47 प्रतिशत की वृद्धी हुई है, इसके विपरित भूजल निकासी में 2 प्रतिशत से अधिक की वृद्धी दर्ज की गई है, उसी के अनुरुप राज्य का भूजल दोहन स्तर 58.40 प्रतिशत से बढ़ते हुए 59.32 प्रतिशत हो गया है। इसी कारण उम्मिदों के बादल न तो गरज रहे हैं न ही बरस रहे हैं। मध्यप्रदेश जिसे नदियों का मायका कहा जाता है उस प्रदेश में नदिया सूख गई है, छोटी नदियों में पानी नहीं होने पर भूजल स्तर में जो कमी आई है उससे कुछ ही वर्षों में प्रदेश पर गंभीर संकट आ सकता है। पलायन के पथ पर अग्रसर परिवार पेट पालने की परिक्रमा में भावी पीढ़ी के भविष्य को पथभ्रष्ट कर देते हैं, शिक्षा से वंचित बच्चें जागरुकता के अलख से दूर अस्वस्थ और कमजोर होते हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश में सड़को की बदहाली और सड़क सुरक्षा व्यवस्था की बदइंतजामी खुलकर सामने आई है। हादसों में पहले नंबर पर तमिलनाड़ु, दूसरे नंबर पर मध्यप्रदेश है, 60 प्रतिशत दुर्घटनाएं जिनमें मौके पर ही मौत, 20 प्रतिशत मौतें अस्पताल पहुंते-पहुंचे ही हो जाती है, वहीं 20 प्रतिशत मौतें उपचार के दौरान हो जाती है। रिपोर्ट में तेज गति के कारण होने वाली दुर्घटना में मध्यप्रदेश अव्वल नंबर पर है वहीं ट्रैफिक नियम तोड़ने के कारण सबसे ज्यादा दुर्घटना मध्यप्रदेश में हो रही है। मध्यप्रदेश में 108 एंबुलेंस सेवा कंपनी की रिपोर्ट जिसमें वर्ष 2025 के आंकड़े निकाले गए है जो कि जनवरी 2025 से अक्टूबर 2025 तक के है, जिसमें यह बताया गया है कि, प्रदेशभर में जो सवा लाख दुर्घटनाएं हुई है उसमें सबसे ज्यादा शिकार युवा वर्ग हुआ है। इंदौर महानगर में ही बीते पांच वर्षों में दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मौतों में वृद्धी पाई गई है जिस पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठीत सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष ने चिंता व्यक्त की है, और कहा है जब दुर्घटनाओं में बड़ोत्तरी और हादसो में मौत की संख्या लगातार बढ़ रही है तो सड़क सुरक्षा के दावे सही कैसे हो सकते हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की ताजा रिपोर्ट प्रदेश के लिए बहुत ही गंभीर और भयावह है, क्योंकि जो प्रदेश का भविष्य बनेगे यह रिपोर्ट उनके स्वास्थ्य से जुड़ी हुई है इस रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कुपोषण घटने के स्थान पर बढ़ता जा रहा है, प्रदेश सरकार का महिला एवं बाल विकास विभाग सुस्त मंत्री और सुस्त तंत्र की कार्य के प्रति कमजोरी और निष्क्रियता के कारण प्रदेश में कुपोषण इस स्तर पर जा पहुंचा है। वर्ष 2023-2024 में भी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण रिपोर्ट ने चेतावनी दी थी कि सम्पूर्ण देश में कुपोषण का सबसे अधिक प्रतिशत मध्यप्रदेश के बच्चों में पाया गया है, और वर्तमान में तो यह प्रतिशत बढ़ा ही है साथ ही जनजाति क्षेत्रों में कुपोषण का प्रभाव पहले से और अधिक बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार तो प्रदेश में कुपोषण बढ़ा है परंतु बीते वर्ष ही प्रदेश की महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री और कलेक्टर मीणा ने झाबुआ जिले के नाम से मोटी आई को लेकर वाहवाही लूटी थी। यदि मोटी आई योजना प्रभावित थी तो क्या राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट या उसके जांच अधिकारी गलत है यह प्रश्न कुपोषण पर बढ़ते आंकड़ो पर लोगों को, विभाग को, सरकार को यहां तक कि सर्वेक्षण करने वालों को भी झकझोड़ने वाला है।
प्रदेश में जल संकट के साथ भूजल संकट भी तेजी से बढ़ रहा है और प्रदेश सरकार के मुखिया अपने मिया मिट्ठु हो कर अपने ही शागिर्दों से अपनी ही पीठ थपथपा रहे हैं। जब रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में भूजल स्तर गहराता जा रहा है तब प्रदेश मुखिया दावा कर रहे हैं कि, 19 मार्च से अब तक पूरे 100 दिनों में 3 लाख 63 हजार जल संवर्धन का कार्य किए जा चुके है जिस पर सरकार का 10,514 करोड़ रुपये का खर्च किया जा चुका है।
बहरहाल, प्रदेश सरकार को झुठे वादें, और दावों से मुक्त होकर धरातल पर कार्य करने की आवश्यकता है साथ ही मुफ्त सुविधा से निर्धन को और निर्धन बनाने से बचना चाहिए वहीं प्रदेश की समस्याओं को चिन्हित कर उस पर उचित समाधान देकर उन समस्या को समाप्त करना चाहिए।