लिव इन रिलेशनशिप में होता है जोखिम, रिश्ता तोड़ कर जाने वाले पर अपराध नहीं बनता।
भारत देश में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जहां अपनी मर्जी से साथ रहने वाले युवक युवती बिना विवाह किए लंबे समय तक साथ रहते हैं, और ऐसे जोड़ीदार अक्सर सुर्खियों में रहते हैं जो एक समय के बाद अलग भी हो जाते हैं। उसके बाद वह लिव इन रिलेशन बहुत से लोगों के लिए उदाहरण बनता है, कुछ लोगों को बात और मजाक का विषय मिल जाता है।
हाल ही में यौन उत्पीड़न के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महिला से पूछा जब 15 वर्ष मर्जी से साथ रहे रिश्ता आपसी सहमती से बनाया बच्चा भी है तब यौन उत्पीड़न कैसे हो गया?
महिला ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी जिसमें कोर्ट ने पूर्व लिव इन पार्टनर के विरुद्ध FIR रद्द कर दी थी।
कोर्ट में महिला के अधिवक्ता ने बताया कि उसके पति की पहले मौत हो चुकी थी फिर उसी के जीजा ने महिला को आरोपी से मिलवाया था उसने विवाह का वचन दिया और उसका यौन शोषण किया। इसी बात पर जस्टिस नागरत्ना ने पूछा कि विवाह से पहले वह क्यूँ उसके साथ चली गई, एक बच्चा भी है। विवाह नही होने के कारण कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं कोई कानूनी बंधन नहीं तब वह छोड़ कर चला जाता है। लिव इन रिलेशनशिप में इसी तरह के जोखिम उठाने पढ़ते हैं इसलिए भारतीय पद्धति में विवाह को संस्कार कहा गया है जिसमें सामाजिक रूप से पति पत्नी एक दूसरे के साथ सम्मान के साथ मिलकर रहते हैं। फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने समझोते की संभावना को तलाशा है और एक नोटिस जारी कर पक्षकारो को पता लगाने के लिए कहा है कि क्या याचिकाकर्ता और आरोपित के मध्य कोई समझौता हो सकता है।