“जंतर-मंतर विश्वविद्यालय: प्रवेश शुरू – डिग्री: BA in आंदोलन”।सूचना! सूचना !! सूचना !!!

लेखक: डॉ बालाराम परमार ‘हॅंसमुख’

हॅंसमुख व्यंग्य 🏹
“”””””””””””””””””””””

NEET का पेपर आउट हुआ, घबराने की कोई जरूरत नहीं है। आप डॉक्टर नहीं बन पाए? कोई बात नहीं। स्टेथोस्कोप छोड़िए, आंदोलन झण्डा उठाइए। क्योंकि अब देश में ‘चट मंगनी, पट ब्याव’ करवाने वाली एक नई यूनिवर्सिटी खुली है- “जंतर-मंतर विश्वविद्यालय।
हमारी डिग्री का नाम है: BA in आंदोलन।
जंतर-मंतर भारत में अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने और बड़े बदलावों को जन्म देने वाली ऐतिहासिक भूमि है, जहां से भारतीय राजनीति की पूरी दिशा ही बदलतीं है।
सोचिए जरा। आप आईआईटी और एम्स में प्रवेश के लिए 12 वीं पास करेंगे, 2 साल JEE Main और JEE Advanced या NEET की तैयारी, फिर 2 साल रिजल्ट का इंतजार। फिर 5 साल बाद डिग्री। फिर एक दो साल नौकरी के लिए इधर-उधर भटकना। तब तक उम्र 30, जेब खाली, और नौकरी और छोकरी के लेटर का इंतजार !
इधर हमारी यूनिवर्सिटी में कोर्स सिर्फ 7 से 10 दिन या ज्यादा से ज्यादा 26 दिन का। फीस? बस एक बैनर, कुछ गलाफाड नारे।

जैसे कि : ‘हमारी मांगे पूरी करो’। ‘प्रधानमंत्री होश में आओ’। ‘हमसे जो टकराएगा चूर चूर हो जाएगा’। अंधेरी रात में,दिपके हमारे साथ में।
रिजल्ट? प्रवेश के तीसरी शाम टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज में आपका फोटो दिखेगा। आपकी इंटरव्यू प्रसारित की जाएगी और आपको महान देशभक्त के रूप में स्थापित कर दिया जाएगा।
प्लेसमेंट की शत-प्रतिशत गारंटी।
क्योंकि हमारे कोर्स की खासियत के बारे में पिछले 2 दशक का रिकॉर्ड उठा कर देखिए।
2011 में अन्ना जी ने यहीं से अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और मनीष जैन को भ्रष्टाचार मिटाओ” का कोर्स कराया था। रिजल्ट के रूप में RTE आया, लोकपाल बिल आया, और बोनस में आम आदमी पार्टी का जन्म एक के साथ पांच फ्री पॉलिसी के अंतर्गत ही मुख्यमंत्री केजरीवाल के साथ चार अन्य मंत्रियों की जेल फ्री।
एक ही आंदोलन में एक पार्टी ,एक मुख्यमंत्री और फ्री में पुरानी पार्टियों का बुखार उतारने की दवा और दारू का ‘फेम’। मतलब प्रसिद्धि, शोहरत और ख्याति और तिहाड़ जेल एक साथ!


अब देखिए ना। फर्जी डिग्री के आधार पर वकालत और अन्य पेशों में घुसपैठ करने वाले लोगों के संबंध में मुख्य न्यायाधीश ने मई 2026 में एक मामले की सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी करते हुए ‘कॉकरोच’ शब्द का प्रयोग कर दिया था। फिर क्या था। कॉकरोच शब्द अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे अभिजीत दिपके को नागवार गुजरा। ऐसे कैसे मेरे रहते हुए युवाओं को कॉकरोच कह सकता है कोई? उन्होंने राजनीतिक मंच कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना कर डाली।

डिजिटल मीडिया और रणनीतिक संचार के जरिए इस युवा आंदोलन में देखते ही देखते कट्टर ईमानदार अरविंद केजरीवाल, मोहब्बत की दुकान खोलने वाले राहुल गांधी और लद्दाख को राज्य का दर्जा दिलाने वाले सोनम वांगचुक खुद पड़े।
सरकार से नाराज़ लोगों को लगा कि है पिछले 12 साल से हम लोगों को हिंदू-मुसलमान की राजनीति में फँसा कर रखा, उनसे बदला लेने का यह अच्छा मौका है। इसे गंवाया तो समझो,गई भैंस पानी में।
दिपके कुलगुरू जी के निर्देशन में NEET वाला दांव चला। पेपर लीक हुआ, छात्र रोए। उन्होंने ने कहा “टेंशन मत लो, जंतर मंतर इकट्ठा हो जाओ । देखते हैं आगे आगे क्या होता है।
इंटरनेट की माया से ऐसा ही हुआ। मात्र 26 दिन में NTA हिला, भारी भरकम केन्द्र सरकार हिली, शिक्षा मंत्री जी को पसीना आया और इस्तीफा देना पड़ा। संसद में नया कानून आ गया।
देख लीजिए, जंतर मंतर यूनिवर्सिटी के आंदोलन की पावर। तो पढ़ाई कैसी होगी?
हमारे प्रोफेसर कौन हैं?
वही अनुभवी लोग जो वामपंथी हैं, विपक्षी हैं, और रातों-रात विदेशी चंदे से टेंट, खाना, पोस्टर मंगवा लेते हैं।
सिलेबस में क्या है?
नारा लगाना – “व्यवस्था बदलो” या “इस्तीफा दो” ।
मीडिया मैनेजमेंट सबसे जबरदस्त।टुकड़े-टुकड़े गैंग के डफली बजाने वालों के साथ चंद मिनट में ट्रेंड करवाएं। प्रैक्टिकल्स में पुलिस से धक्का-मुक्की, और कैमरे के सामने आंसू।

डिग्री के बाद क्या? अरे भाई, डिग्री हाथ में आते ही आप्शन ही आप्शन।
राजनीतिक पार्टियां आपको तुरंत टिकट देगी। “छात्र नेता” का तमगा लगेगा।
NGO के मंच और यूट्यूब चैनल पर भाषण के ₹50,000 प्रति घंटा। जंतर-मंतर गवाह है कि यहीं से कई मंत्री -मुख्यमंत्री बने हैं।
सबसे बड़ी बात – कम लागत, कम समय, और फुल मीडिया कवरेज।
पढ़ाई के दौरान ही बंगले का सपना देखना शुरू कर दीजिए। मंत्री बनकर करोड़ों के बंगले का आनंद ।
तो देर किस बात की युवाओं? कोचिंग का पैसा बचा लीजिए। किताबें बेच दीजिए। आइए जंतर-मंतर विश्वविद्यालय में। यहाँ फेल होने का डर नहीं है। यहाँ तो जितने दिन भूख हड़ताल पर बैठोगे, उतनी बड़ी डिग्री।
क्योंकि इस देश में अब कानून संसद से नहीं, भीड़ से बनता है।
इतिहास मेहनत से नहीं, बैनर से लिखा जाता है।
सुविधा के लिए अतिविशिष्ट
नोट : एडमिशन के लिए राष्ट्र विरोधी आधार कार्ड, एक कहीं डंडा खाती हुई फोटो, और “सिस्टम खराब है”, वाला जोश लेकर आएं।
खाना और पानी की व्यवस्था विदेशी प्रायोजकों द्वारा की जाएगी।
जय बोलो जंतर-मंतर विश्वविद्यालय की!


डॉ बालाराम परमार ‘हॅंसमुख’

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *