भारत दारूल हर्ब इसीलिए इस्लाम के लिए लव जिहाद।
रिंकेश बैरागी,
भारतवर्ष में लव जिहाद का आंकड़ा निकाले तो अनेकानेक किस्से मिल जाएंगे, जिसमें मुस्लिम युवक धोके से हिंदु या गैर मुस्लिम युवती को अपने जाल में फंसाता है, फिर उस युवती को इस्लाम मानने के लिए दबाव बनाता है यदि वह नहीं मानती है तब मुस्लिम युवक उसे प्रताडित कर उसकी हत्या कर देता है। ऐसी लाखों युवतियां है जो लव जिहाद का शिकार हुई और उन पर इस्लाम को मानने के लिए दबाव बनाया गया। भोपाल में युवतियों को लव जिहाद का शिकार बनाकर उन पर मतांतरण का दबाव बनाने वाले गिरोह के सामने आने पर प्रदेश की राजधानी में मुस्लिम युवकों के संगठन से संचालित नेटवर्क का जिहादी चेहरा उजागर होकर सामने आया हैं। इस नेटवर्क के मुस्लिम, हिंदु युवतियों को फंसाने के लिए अपराध के किसी भी स्तर पर जाते हैं। मुस्लिम, हिंदु नाम बताते हैं और हिंदु युवतियों से दोस्ती करते हैं, लव जिहादी नशे के व्यापारी भी होते हैं और बहला फुसला कर युवतियों को नशा करवाते हैं, फिर बलात्कार कर ब्लेकमेलिंग करते रहते हैं। जिहादी नेटवर्क में मुस्लिम युवतियां भी शामिल है, वहीं इस नेटवर्क के तार अहमदाबाद तक जुड़े हुए है।
समस्या इतनी नहीं है कि भारत देश में हिंदु युवतियों को मुसलमान युवा इस्लाम में आने के लिए मजबूर कर रहे हैं। समस्या अज्ञान के अंधकार की है। इस वाक्य में कितनी पवित्रता है कि पूरी दुनिया को इस्लामिक बनाना है, और फिर दबाव से ही क्युं बनाना है। सत्य, पवित्र, सरल, सहज, निष्कपट से भी तो किसी सत्य विचार को प्रभावी बनाया जा सकता है। तब समझा जा सकता है कि, जिस विचार को फैलाने के लिए झुठ, फरेब, धोका, स्वार्थ कपट का उपयोग करना पड़ रहा हो वह विचार सत्य से कितना कम प्रभाव रखता है।
इस्लाम का जन्म लगभग 1400 वर्ष पहले हुआ माना जाता है, इस्लामी आक्रांताओं ने भारतवर्ष पर हमला किया और लगभग एक हजार वर्ष पहले से ही इस्लामी लोग भारत में इस्लाम को प्रभावी करने के लिए प्रयासरत हैं लेकिन युद्ध के माध्यम से इस्लामी आक्रांताओं को संतोषजनक सफलता प्राप्त नहीं हो पाई। भारत देश में छत्रपति शिवाजी महाराज ने इस्लामी राजाओं को पछाड़ दिया। इस्लामी आक्रमण में भारत में करोड़ो लोगों ने मृत्यु के भय से इस्लाम कबुल कर मुसलमां हो गए।
भारत देश स्वतंत्र हुआ और 21वी सदी तक पहुंच गया लेकिन अपने दीन के प्रभुत्व को बढ़ाने के लिए मुसलमान निरंतर प्रयासरत हैं। जो कट्टरपंथियों की सोच है उसे प्रभावी करते हुए भारत के गांव-गांव में घुसकर कट्टरपंथी मुसलमान जिहाद करने लगे और निरंतर कर ही रहे हैं। जिहाद का शाब्दिक अर्थ है कोशिश या प्रयास, यह प्रयास, यह कोशिश पुरी दुनिया में इस्लाम को फैलाने की है। चूंकी किसी भी कार्य के लिए प्रयास या कोशिश करना अपने आप में एक संघर्ष है इसलिए जिहाद एक संघर्षरत प्रयास है। जिहाद इसलिए है क्योंकि, सारी धरती अरबी खुदा अल्लाह के मजहब इस्लाम की हो जाएं। फिर कट्टरपंथियों ने झुठ का सहयोग लेकर अपने मनसूबो में सफल होने के लिए बहुत से काम ऐसे भी किए है जिसे करने नहीं चाहिए।
कुरआन की आयत 9:33 के अनुसार मुस्लिमों को इस धरती पर इस्लाम फैलाने का संदेश है भले ही मुशरिको (भारत के संदर्भ में हिंदुओं) को बुरा लगे। अर्थात अपने दीन को दुसरो के धर्म पर प्रभावी करना है, अब चूंकि मुस्लिमों को इस्लाम फैलाना है और अपने दीन को फैलाने के लिए कोशिश करना है उनका यही प्रयास जिहाद है इसलिए ही कट्टरपंथी मुस्लिम कहते है कि, वे जद्दोज़हद कर रहे हैं। कट्टरपंथियों के अनुसार जिहाद किसी भी प्रकार का हो सकता है वह किसी भी गैर मुस्लिम की हत्या करके, उनकी जमीन पर कब्जा करके, या फिर लव जिहाद करके अपने उद्देश्य की पूर्ति करना है। कट्टरपंथियों का मकसद होता है कि दुनिया में ज्यादा से ज्यादा हिस्से पर इस्लाम का कब्जा हो, और ज्यादा से ज्यादा लोग अरबी परंपराओं को माने। लोग अरब की दिशा में दिन में 5 बार सर झुकाए, वहीं के गुलाम बनें, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति अल्लाह को एक मात्र सच्चा ईश्वर माने और अरबी पेगम्बर मोहम्मद साहेब को सच्चा मार्गदर्शक या गुरु मानते हुए जन्म से लेकर मृत्यु तक अरबी परंपराओं को फॉलो करते हुए सिर्फ और सिर्फ अरबी भाषा में ही इबादत करे। जबकि समझने वाली बात यह है कि, परंपराएं तो पर्यावरण और वातावरण के अनुरुप बनाई जाती है। इस्लामी किताब के अनुसार मुस्लिम कभी भी गैर मुस्लिम का सगा नहीं हो सकता दोस्त भी नहीं। जो मुस्लिम अपनी चचेरी, ममेरी, फुफेरी भाई-बहनों में विवाह कर उन बहनों को पत्नी बनाकर बच्चें पैदा कर सकता है वह किसी गैर मुस्लिम का भाई या गैर मुस्लिम की बहन तो बन ही नहीं सकता है। भारत को दारुल हर्ब मानकर सारे जिहाद यहीं पर इसीलिए किए जाते हैं क्योंकि, दारुल हर्ब अर्थात युद्ध का क्षेत्र, और कट्टरपंथियों के अनुसार भारत इसलिए दारुल हर्ब है क्योंकि यहां इस्लाम का राज्य नहीं है… और फिर इस्लामिक पद्धति के अनुरुप युद्ध एक धोका है, यह प्रसिद्ध हदीस सहीह अल बुखारी, हदीस नंबर 3029 के अनुसार है।
कट्टरपंथी मुस्लिम स्वरुप बदलकर छल, बल, साम, दाम, दण्ड भेद और भी अन्य तरह से धोका देकर इस्लाम को फैलाने के मकसद में स्वयं को झोंक देते हैं। हालांकि, जन्नत में हुर का लालच देकर जिहाद में सफल होने के लिए भी कसम तोड़ देने की हदीस लिखी है, जिसे कट्टरपंथी मुस्लिम लव जिहाद में उपयोग करते हैं।बहरहाल, हिंदु युवतियों को स्वयं की क्षमताओं को जागृत कर अपने अज्ञानता के कक्ष में ज्ञान के प्रकाश को फैलाने की आवश्यकता है। समाजजनों द्वारा ऐसे सेमिनार भी आयोजित करवाए जाने चाहिए जहां जागरुकता का संदेश सटीक और सुस्पष्टता हो। वहीं कट्टरपंथियों को भी जागरुक होने की जरुरत पर कदम बढ़ाना चाहिए, झुठ के रास्ते में शुरुआत में सरलता होगी लेकिन उसके बाद राहों में कठिनाइयां ही होगी। सच्चाई की राह प्रेरणादायक होगी, विवादों से दूर शांति के मार्ग पर लेकर जाएगी। अपने अध्ययन पर शत्रुओं की शक्ति उनकी क्षमताओं को परखते हुए स्वयं की शक्ति और क्षमताओं से भलीभांति परिचित होने की आवश्यकता है।