पीजी कॉलेज झाबुआ के प्राचार्य ने नहीं किया उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य का भुगतान

:’ सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के 112 दिन बाद भी निराकरण नहीं हुआ

” मूल्यांकन केंद्र होने से प्राचार्य को ही करना था भुगतान ”

शिकायतकर्ता आर्थिक व मानसिक रूप से हो रहा परेशान ‘

वास्तव में सुशासन को बेहतरीन बनाने‌ और नागरिकों को केवल एक कॉल में त्वरित जानकारी व समस्याओं के समाधान के लिए एमपी सरकार की सीएम हेल्पलाइन सुविधा एक दूरगामी पहल मानी जाती है। लेकिन 112 दिन बाद भी पीएम कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस शासकीय पीजी कॉलेज झाबुआ ( मूल्यांकन केंद्र ) के प्राचार्य द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य का भुगतान नहीं किया गया है।

जी हां सत्र 2024 – 25 में शासकीय अतिथि विद्वान शंकरलाल खरवाडिया पीजी कॉलेज झाबुआ में इतिहास विषय में कार्यरत थे। जिन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर द्वारा मूल्यांकन कार्य हेतु भेजी गई बीए द्वितीय वर्ष इतिहास की 400 उत्तरपुस्तिका व एमए चतुर्थ सेमेस्टर इतिहास की 200 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य मई व जुलाई 2025 में किया था। भुगतान बिल पत्रक महाविद्यालय में ही उत्तर पुस्तिका के बंडल जमा करते समय ही जमा कर दिए गए थे। दोनों कक्षाओं का मानदेय 14 प्रतिशत कटोत्रा के बाद 8600 रुपए होता है। इस संबंध में अतिथि विद्वान द्वारा अनेकों बार प्राचार्य से भुगतान के संबंध में मौखिक रूप से चर्चा की गई। लेकिन प्राचार्य का हर बार यह कहना होता था कि जब देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर से एडवांस राशि आएगी, जब भुगतान होगा। आप पीड़ित व्यक्ति हैं, जहां चाहें शिकायत कर सकते हैं।

अंततः परेशान होकर अतिथि विद्वान ने सीएम हेल्पलाइन शिकायत क्रमांक 36256136 दिनांक 9 जनवरी 2026 को दर्ज करवाई। लेकिन हर बार उक्त शिकायत के जवाब में एल वन से लिखा जाता है कि भुगतान हेतु देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर को मांगपत्र भेजा गया है। अंकेक्षण उपरांत राशि प्राप्त होने पर भुगतान किया जाएगा। जवाब से बचने के लिए यह शिकायत बार – बार एल वन से एल टू पर फारवर्ड होती रही। अब एल थ्री पर पहुंच चुकी है, फिर भी अब तक भुगतान नहीं हुआ है।वास्तव में नियमानुसार प्राचार्य द्वारा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के मूल्यांकन केंद्र से एडवांस राशि की मांग समय से पूर्व की जाती है। तत्पश्चात मूल्यांकनकर्ताओं को भुगतान हो पाता है।शिकायतकर्ता ने बताया है कि प्राचार्य की लापरवाही के कारण मुझे आर्थिक एवं मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हर बार शिकायत को अपडेट करवाने के बाद भी मुझे अब तक निराशा ही हाथ लगी है। जो भी इसके लिए जिम्मेदार है, उन पर अनुशासनात्मक कार्यवाही अग्रषेण अधिकारीयों को करना चाहिए।

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