हाइड्रोजन ट्रेन : विकसित भारत की हरित ऊर्जा क्रांति का नया अध्याय। स्वच्छ ऊर्जा, वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत की ऐतिहासिक छलांग।

स्वच्छ ऊर्जा, वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत की ऐतिहासिक छलांग।

लेखक : राजेश कुमरावत ‘सार्थक’

जब कोई राष्ट्र केवल वर्तमान की आवश्यकताओं को नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को ध्यान में रखकर निर्णय लेता है, तभी वह विश्व नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ता है।

भारत की पहली हाइड्रोजन ऊर्जा से संचालित ट्रेन इसी दूरदर्शी सोच, वैज्ञानिक आत्मविश्वास और राष्ट्रीय संकल्प का सजीव प्रतीक है। यह केवल एक नई रेलगाड़ी का शुभारंभ नहीं, बल्कि विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत और हरित भारत के उस स्वप्न का उद्घोष है, जिसमें आर्थिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक बनकर आगे बढ़ते हैं।

आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संकट और कार्बन उत्सर्जन की गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे समय में भारत ने हाइड्रोजन आधारित रेल तकनीक विकसित कर यह स्पष्ट संकेत दिया है कि वह भविष्य की तकनीकों का केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता और नेतृत्वकर्ता बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह उपलब्धि भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीशियनों और देश के दूरदर्शी नेतृत्व की सामूहिक सफलता है।

हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक की विशेषता यह है कि इसमें हाइड्रोजन और वातावरण की ऑक्सीजन के रासायनिक संयोजन से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न होती है तथा उप-उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प निकलती है। अर्थात् न धुएँ का प्रदूषण, न कार्बन उत्सर्जन और न ही जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता। यही कारण है कि विश्व के विकसित देश हाइड्रोजन को भविष्य की सबसे स्वच्छ ऊर्जा के रूप में देख रहे हैं और भारत ने इस दिशा में एक निर्णायक कदम बढ़ाया है।

भारत पहले ही सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जैव ईंधन तथा हरित हाइड्रोजन मिशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त कर चुका है। रेलवे जैसे विशाल परिवहन तंत्र में हाइड्रोजन तकनीक का समावेश देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को नई मजबूती देगा। इससे डीजल की खपत कम होगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी, वायु प्रदूषण में कमी आएगी और करोड़ों नागरिकों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लासगो में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन (COP-26) में भारत की ओर से हरित विकास का जो संकल्प विश्व समुदाय के सामने रखा था, हाइड्रोजन ट्रेन उसी संकल्प का व्यवहारिक रूप है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास हाइड्रोजन आधारित ट्रेन निर्माण की संपूर्ण तकनीक उपलब्ध है।

लोकतंत्र में सरकारों की नीतियों पर मतभेद और आलोचना स्वाभाविक हैं, किंतु जब कोई उपलब्धि विज्ञान, पर्यावरण, राष्ट्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और भावी पीढ़ियों के हित से जुड़ी हो, तब उसे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देखना चाहिए। राष्ट्रीय उपलब्धियाँ किसी सरकार की नहीं, पूरे राष्ट्र की पूँजी होती हैं।

यदि आने वाले वर्षों में हाइड्रोजन ट्रेनों का विस्तार देशभर में होता है, तो यह केवल भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की कहानी नहीं होगी, बल्कि भारत की ऊर्जा क्रांति का स्वर्णिम अध्याय भी सिद्ध होगी। यह उपलब्धि आने वाले भारत की उस तस्वीर को साकार करती है, जहाँ विकास की गति भी होगी और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता भी।

लेखक – वरिष्ठ पत्रकार | समसामयिक विषयों के विश्लेषक | संपादक – जनमत जागरण | स्वदेशी चिंतक

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