नाग: इतिहास:- धर्म-ग्रंथ, अंधविश्वास और पर्यावरण का संपूर्ण सच* भारत में यदि किसी एक प्राणी ने *भय, श्रद्धा, रहस्य, शक्ति, जल, उर्वरता, मृत्यु और अमरत्व इन सभी भावों को एक साथ धारण किया है, तो वह नाग है।
अवधूत चिंतन श्री गुरुदेव दत्त
नाग या सर्प हमारे सामने एक विचित्र द्वंद्व उपस्थित करता है। वह विषधर है, इसलिए भय का कारण है; लेकिन वही चूहे खाकर अन्न की रक्षा करता है। *वह धरती के भीतर रहता है, इसलिए भूमिगत रहस्य का प्रतीक है*; वर्षा और जल से उसका संबंध जोड़ा गया; वह अपनी *केंचुली उतारकर नया रूप धारण करता है, इसलिए पुनर्जन्म और नवीनीकरण का प्रतीक बन गया।* वह कुंडली मारकर बैठता है और अचानक फन उठाता है, इसलिए सुप्त शक्ति तथा जागृत शक्ति, दोनों का प्रतीक बन सकता है।यही कारण है कि भारतीय परंपरा में नाग केवल “साँप” नहीं रह गया। वह नागदेवता, नागराजा, नागलोक, शेष, अनन्त, वासुकि, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म आदि अनेक रूपों में विकसित हुआ।भारतीय संस्कृति और वैश्विक इतिहास में ‘नाग’ का स्थान अत्यंत विलक्षण रहा है। जहाँ एक ओर *नागों को प्राचीन ग्रंथों, राजवंशों और धार्मिक आस्थाओं में पूजनीय स्थान मिला, वहीं दूसरी ओर अज्ञानता और अंधविश्वास के कारण यही जीव आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है*।
आइए, नागों के हिन्दू सनातन धर्म-ग्रंथों, इतिहास, अन्य विश्व-धर्मों, वैज्ञानिक तथ्यों और पर्यावरण में उनके महत्व को गहराई से समझें: *1. हिन्दू धर्म-ग्रंथों (वेद, उपनिषद, पुराण, भागवत व रामायण) में नागों का उल्लेख*सनातन परंपरा में नाग केवल जीव नहीं, बल्कि दिव्य शक्ति, ब्रह्मांडीय ऊर्जा और महर्षियों की संतान के रूप में वर्णित हैं: *वेदों में नाग (Vedas)*ऋग्वेद में *अहि (ahi)* शब्द का प्रयोग सर्प के लिए हुआ है। सबसे प्रसिद्ध उदाहरण अहि वृत्र है, वह जलों को रोकने वाली शक्ति के रूप में वर्णित होता है और *इन्द्र* उसके वधकर्ता हैं। इस घटना का वर्णन आप मेरे पिछले आलेख इंद्र *वृत्तासुर संग्राम में पढ़ चुके हैं* ।ऋग्वेद: ऋग्वेद में *’अहि बुध्न्य’* (गहरे जल और पाताल का सर्प) का उल्लेख मिलता है, जिसे जल और अंतरिक्ष की गुप्त शक्तियों का रक्षक माना गया है।
अथर्ववेद:* अथर्ववेद के कांड 8 और 10 में तक्षक, धृतराष्ट्र आदि नाग कुलों का उल्लेख है तथा सर्पदंश निवारण के मंत्र दिए गए हैं। *उपनिषदों में नाग* (Upanishads)*छान्दोग्य उपनिषद*: इसमें ‘सर्प-विद्या’ (सर्पों और नागों का अध्ययन) को 64 विद्याओं व उपवेदों में स्थान दिया गया है, जो इस बात का प्रमाण है कि प्राचीन काल में सर्प-विज्ञान अत्यंत उन्नत था। *पुराणों में नाग* (Puranas)उत्पत्ति कथा: पुराणों (विष्णु व पद्म पुराण) के अनुसार, *महर्षि कश्यप की दो पत्नियाँ थीं, कद्रू (नागों की माता) और विनता (गरुड़ की माता)।* एक शर्त के दौरान कद्रू ने छल से विनता को हरा दिया और उसे अपनी दासी बना लिया।विनता को दासत्व से मुक्त कराने के लिए गरुड़ जी देवलोक से अमूर्त अमृत कलश लेकर आए। कद्रू के पुत्रों (नागों) ने जब अमृत चाटने का प्रयास किया, तो कुशा (डाभ) घास की धार से उनकी जीभ दो भागों में कट गई। इसी कारण सर्पों की जीभ द्विभाजित होती है।अष्टनाग (आठ प्रमुख कुल): अनंत (शेष), वासुकि, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म, शंखपाल और कुलिक।समुद्र मंथन: मंदराचल पर्वत को मथने के लिए नागराज वासुकि ने स्वयं को नेती (रस्सी) के रूप में समर्पित किया था।*कुबेर की अष्टनिधियाँ: मार्कंडेय पुराण के* अनुसार, धन के देवता कुबेर के खजानों (पद्म, महापद्म, शंख आदि) के रक्षक नाग ही हैं। *श्रीमद्भागवत महापुराण में नाग* (Bhagavatam)*महाभारत का प्रारंभ ही सर्पसत्र (नाग यज्ञ) की कथा से होता है।* राजा जनमेजय द्वारा नागों के विनाश हेतु किए गए इस यज्ञ को आस्तिक मुनि ने समाप्त कराया था। महाभारत में *अर्जुन का विवाह नागकन्या उलूपी* से होता है। इसी प्रकार *भीम के नागलोक जाने की कथा*, नागों द्वारा उसे शक्ति प्रदान करना और नागों के राजकीय-सामाजिक संगठन की अनेक कथाएँ इस परंपरा को और समृद्ध करती हैं।*कालिया दमन:* यमुना जी को विषमुक्त करने के लिए बाल-कृष्ण द्वारा कालिया नाग का मर्दन कर उसे अभयदान देने की कथा अत्यंत प्रसिद्ध है।*शेषनाग अवतार:* भगवान विष्णु के अनन्य भक्त एवं शय्या-रूप *शेषनाग जी ने द्वापर में भगवान बलराम* के रूप में अवतार लिया था। *श्री रामायण में नाग* (Ramayana)
*लक्ष्मण जी शेषनावतार:* वाल्मीकि रामायण के अनुसार, श्री राम के छोटे भाई लक्ष्मण जी स्वयं शेषनाग के साक्षात अवतार थे।नागपाश से मुक्ति: युद्ध कांड में जब मेघनाद ने श्री राम और लक्ष्मण को ‘नागपाश’ बाण से बाँध दिया था, तब पक्षीराज गरुड़ ने आकर उन्हें नागपाश के बंधन से मुक्त कराया था।*नागकन्या उलूपी/सुरसा: सुंदरकांड में समुद्र लांघते समय हनुमान जी की परीक्षा लेने वाली ‘सुरसा’ को नागों की माता माना गया है।* *2. नागों का प्राचीन इतिहास और राजवंश*भारत मैं प्राचीन काल से ही नाग परंपरा नाग पूजन प्रचलित है। दक्षिण भारत में निवास करने वाले निवासियों का *मुख्य कुल-चिह्न (Totem) नाग था। ये स्वयं को ‘नागवंशी’ कहते थे*।“दक्षिण भारती में नाग *सिंधु परंपरा से तमिलकम, केरल के सर्पकावु, तुलुनाडु के नागबन और कर्नाटक की नागमंडल परंपरा तक” उल्लेख मिलते हैं।**भारशिव नाग वंश:* कुषाणों के पतन के बाद उत्तर व मध्य भारत में भारशिव नाग वंश का उदय हुआ। *नागपुर, पद्मावती (ग्वालियर) और मथुरा इनकी प्रमुख राजधानियाँ थीं।**पचमढ़ी की नागद्वारी यात्रा:* सतपुड़ा के सघन वनों में स्थित नागद्वारी गुफा यात्रा प्राचीन नागवंशी संस्कृति और गोंड व कोरकू आदिवासियों की ऐतिहासिक धरोहर है। 3. अन्य धर्मों में नागों के प्रति दृष्टिकोण*जैन धर्म: 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का प्रतीक चिह्न ‘नाग’ है।* तपस्या के दौरान नागराज धरणेंद्र और पद्मावती ने अपने फण का छत्र बनाकर उपसर्गों से उनकी रक्षा की थी।*बौद्ध धर्म: बोधगया में भगवान बुद्ध की आँधी-तूफान से रक्षा करने वाले नागराज मुचलिंद का उल्लेख मिलता है*। महान दार्शनिक आचार्य नागार्जुन का नाम भी नाग परंपरा से जुड़ा है।*ईसाई धर्म: बाइबिल (Genesis) में सर्प को ईव को प्रलोभन देने वाले शैतान और ‘आदि पाप’ के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है*।*इस्लाम: हदीसों के अनुसार कुछ जिन्न सर्प का रूप ले सकते हैं। अतः घर में दिखे सर्प को सीधे मारने के बजाय दूर भगाने का निर्देश है*। *मूसा (Musa) के जीवन की कथा में अल्लाह मूसा की लाठी को एक जीवित सर्प में बदल देता है।**सूरह ताहा 20:20 में कहा गया है कि मूसा की लाठी उनके सामने दौड़ता हुआ सर्प बन गई।* *4. नाग पंचमी, सपेरे और क्रूरता का सच*नाग पंचमी पर साँपों को दूध पिलाना एक बहुत बड़ा भ्रम है। साँप माँसाहारी सरीसृप (Reptile) हैं, वे दूध नहीं पीते।भूख और प्यास का खेल: सपेरे हफ्तों पहले साँपों को पकड़कर भूखा-प्यासा रखते हैं। निर्जलीकरण (Dehydration) के कारण बेबस होकर साँप दूध को पानी समझकर पी लेता है।*अत्याचार व मृत्यु:* विष-दाँत तोड़ने से उनके मुख में गंभीर संक्रमण हो जाता है और टोकरियों में मुड़े रहने से पसलियाँ टूट जाती हैं। कैद में रखा गया कोई भी साँप 1 महीने से अधिक जीवित नहीं रह पाता।
*5. फ़िल्मी मिथक और अंधविश्वास*इच्छाधारी साँप और बदला: सर्पों का मस्तिष्क प्राथमिक होता है, उनमें बदला लेने या प्रेम जैसी जटिल भावनाएँ नहीं होतीं।आँखों में चित्र छपना: किसी सर्प के मरने पर आँखों में चित्र छपने की बात वैज्ञानिक रूप से गलत है।*नागमणि: ‘इच्छाधारी नाग’ या ‘नागमणि’ का कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं है।* *6. वैज्ञानिक तथ्य और ‘बिग फोर’ (Big Four)*सभी साँप जहरीले नहीं होते: 2,600 प्रजातियों में से मात्र 450 ही विषैली हैं, और उनमें से केवल 25-30 ही इंसानों के लिए घातक हैं।भारत के ‘बिग फोर’: भारत में 90% मौतें केवल 4 प्रजातियों से होती हैं, करैत, कोबरा, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर।आत्मरक्षा में प्रहार: कोई भी साँप बेवजह हमला नहीं करता, विष उनके शिकार को पचाने के लिए होता है। *7. नाग पर्यावरण के असली मित्र: ‘कृषकों के रक्षक’*फसलों की सुरक्षा: एक साँप हर साल औसतन लगभग 100/150 से अधिक चूहों को खा जाता है। साँप न हों, तो चूहे पूरी फसल नष्ट कर देंगे।*अस्तित्व पर खतरा:* खाल की तस्करी, जंगलों की कटाई और अंधविश्वास के कारण इनकी संख्या तेजी से घट रही है। भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत साँपों को पकड़ना या बेचना दंडनीय अपराध है। *निष्कर्ष एवं हमारा कर्तव्य:*शास्त्रों से लेकर पर्यावरण विज्ञान तक यह स्पष्ट है कि सर्प हमारी पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) के रक्षक हैं।*सच्ची नाग पूजा वह है जो इस जीव के संरक्षण का संदेश दे, उसके शोषण का नहीं।**नाग पंचमी पर सपेरों के आडंबर का बहिष्कार करें।*घर/खेत में साँप दिखने पर उसे मारने के बजाय वन विभाग या स्नेक रेस्क्यूर (Snake Rescuer) को सूचित करें।*अंधविश्वास और भ्रांतियों को तोड़कर वैज्ञानिक व शास्त्रसम्मत दृष्टिकोण अपनाएँ।* नाग को यदि केवल सर्प मानेंगे तो भारतीय नाग-परंपरा का बहुत छोटा हिस्सा ही समझ पाएँगे।
नाग एक सीमांत प्रतीक है।धरती और जल के बीच,भूमि और अधोलोक के बीच,भय और श्रद्धा के बीच,प्रकृति और संस्कृति के बीच,जीवन और मृत्यु के बीच,स्थानीय लोकदेवता और महान देवता के बीच।इसीलिए वहशिव के गले में भी है,विष्णु की शय्या भी है,बुद्ध की रक्षा भी करता है,पार्श्वनाथ के ऊपर छत्र भी बनता है,महाभारत में राजा भी है,पुराणों में लोकपाल भी है,गाँव में नागदेवता भी है,औरयोग में कुण्डलिनी की शक्ति भी।यही भारतीय संस्कृति की विशेषता है, वह प्रकृति को देवत्व देती है और देवत्व को मनुष्य के जीवन से जोड़ देती है।
अवधूत चिंतन श्री गुरुदेव दत्त (ज्ञानवर्धक और आँखें खोलने वाली इस पोस्ट को अपने परिजनों और मित्र-समूहों में अवश्य शेयर करें!)