अधेड़ उम्र होने से अतिथि विद्वानों की हो रही अब फजीहत
लगातार नियमित नियुक्ति से हो रहें फॉलेन आउट ” मोहन सरकार से पारदर्शी नीति बनाने की दरकार ‘
प्रदेश के शासकीय कॉलेजों के अतिथि विद्वानों की नौकरी हांसिए पर आ गई है। लगातार सहायक प्राध्यापक भर्ती 2022 की नियुक्ति से अतिथि विद्वान फॉलेन आउट होते जा रहे हैं। 25 मार्च को अर्थशास्त्र विषय में 100 नवीन पोस्टिंग का आदेश निकाल दिया गया। अभी रसायन शास्त्र, समाज शास्त्र, राजनीति विज्ञान सहित 6 विषयों में ओर पोस्टिंग होना है। जिससे फॉलेन आउट की बाढ़ आ जाएगी।पिछली शिवराज सरकार में आयोजित पंचायत की घोषणाओं के बाद भी इन्हें आर्थिक व मानसिक परेशानी झेलना पड़ रही है। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार द्वारा हरियाणा पॉलिसी की घोषणा को तीन माह होने को है, फिर भी अब तक कुछ नहीं हुआ है। अनियमित रूप से आयोजित हुई सहायक प्राध्यापक भर्ती :वास्तव में पीएससी से सहायक प्राध्यापक भर्तियां वर्ष 1991 के बाद अत्यंत अनियमित रूप से आयोजित की गई हैं। बैकलॉग को छोड़कर सहायक प्राध्यापक भर्ती 2017, 2022 एवं 2024 में ही निकाली गई। लगभग 17 वर्षों तक भर्ती आयोजित नहीं की गई। जिसके कारण अल्प मानदेय में सेवा देने वाले अतिथि विद्वान आर्थिक, मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से टूट गए। अनेकों काल के गाल में समा गए।इसके अतिरिक्त हम विगत तीन भर्तियों 2017, 2022 एवं 2024 का विश्लेषण करें, तो इसमें नाममात्र के ही अतिथि विद्वानों का चयन हुआ है। 2017 और 2022 में केवल 20 अंक 5 साल अनुभव के देकर पीछा छुड़ा लिया गया। वर्ष 2024 की भर्ती में 25 प्रतिशत आरक्षण भी उन्हें मिल रहा है, जिसने एक सत्र में 151 कालखंड अथवा कार्य दिवस काम किया है। 20 साल का अनुभव का कोई महत्व नहीं। इसके कारण पुराने अतिथि विद्वानों की फजीहत हो रही है। अब अधेड़ उम्र में कहां जाएंगे।
अतिथि विद्वानों की काबिलियत पर लगाया जा रहा प्रश्न चिन्ह :
वहीं अधिकतर के पास नेट, सेट, पीएचडी और अनुभव होने के बाद भी उनकी योग्यता और काबिलियत पर प्रश्नचिन्ह लगाए जा रहे हैं? तो क्या पिछले 24 सालों से इन्हीं के माध्यम से शिक्षण कार्य कराना राज्य के विद्यार्थियों के हित में उचित था? विचारणीय प्रश्न है। सहायक प्रोफेसर भर्ती 2022 की नियुक्ति के एक माह बाद भी संशोधन :सहायक प्रोफेसर भर्ती 2022 से चयनित को एक बार कॉलेज अलॉट होने और ज्वाइनिंग लेने के एक माह बाद भी आदेश में संशोधन किया जा रहा है। जिससे अतिथि विद्वानों को दो कॉलेज से फॉलेन आउट होना पड़ रहा है। प्राचार्यों ने वर्कलोड का बहाना करके सैकड़ों पदों को फ्रीज कर रखा है। च्वाइस फिलिंग में रिक्त पद नहीं आ रहें हैं।
अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा की पारदर्शी नीति बनाने की मांग :
मध्य प्रदेश अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह भदौरिया और मीडिया प्रभारी शंकरलाल खरवाडिया ने मोहन सरकार से विशेष दरकार लगाते हुए बताया है कि अतिथि विद्वानों के हित में पारदर्शी एवं दीर्घकालिक नीति मोहन सरकार को बनानी चाहिए। जिससे 24 वर्षों तक अल्प मानदेय में दूर दराज के कॉलेजों में की गई सेवा का लाभ हमें मिल सकें। क्या अतिथि विद्वानों को हरियाणा सरकार से भी बेहतर सामाजिक सुरक्षा एमपी सरकार नहीं दे सकती है। यह सोचनीय प्रश्न है।