संकट की स्थिति में भारतीय समाज में साहस, संयम और समझदारी की आवश्यकता।

रिंकेश बैरागी,

दो पक्षो के मध्य चल रहे युद्ध का परिणाम उनके बीच युद्ध विराम या उसकी समाप्ती के पश्चात सामने आते हैं, परंतु युद्ध के दौरान भीषण विनाश और अन्य समस्याएं उसी समय से शुरु हो जाती है जिस पल से युद्ध आरंभ हो जाता है। ईरान-अमेरिकी, इजरायल का युद्ध 25 दिनों से अधिक हो गया वहीं वर्तमान में उसके थमने के अभी कोई आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं क्योंकि ईरान की अपनी जीद है तो इजरायल का हठ और अमेरिका की अपनी मनमानी इस युद्ध को किनारे पर नहीं होने दे रही है। युद्ध के इस तेवर से पुरे विश्व में हलचल मची हुई है क्योंकि इसके दुष्प्रभाव ने विश्व में गंभीर उर्जा संकट को जन्म दे दिया है। व्यापार के रास्तें प्रभावित हो रहे हैं, पेट्रोल, डीजल, गैस और फर्टीलाईजर, जैसे सामान की नियमित आपुर्ती प्रभावित हो रही है, अन्य देशों की तरह यह स्थिति भारत के लिए भी चिंताजनक है।संसद में पश्चिम एशिया संकट पर राज्यसभा में वक्तव्य देते हुए प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने मंगलवार को इस युद्ध के दुष्प्रभाव लंबे समय तक रहने की आशंका जताते हुए कहा कि हमें हर चुनौती के लिए तैयार रहना होगा। प्रधानमंत्री ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि सरकार सतर्क है और सभी संभव प्रयास के लिए तत्पर है, साथ ही पूरी गंभीरता से रणनीति बनाकर निर्णय ले रही है, और हर वह निर्णय सरकार के लिए सर्वोपरी है जो देश की जनता के हितों को सुरक्षित रखता है।

भारत के प्रधानमंत्री ने परिस्थिति को समझाते हुए कहा है कि, होमुर्ज स्ट्रेट विश्व व्यापार का सबसे बड़े रुट में से एक है, इस क्षेत्र से बड़ी मात्रा में विशेष तौर पर कच्चे तेल, गैस, और फर्टीलाइजर से जुड़ा परिवहन होता है। युद्ध के आरंभ होने पर होमुर्ज स्ट्रेट में जहाजों का आवागमन बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है परंतु इन सारी विपरित परिस्थितियों के बावजुद भी भारत सरकार ने संवाद और कुटनीति के माध्यम से अपने जहाजों का वहां से भारत तक आने का रास्ता बनाने का सफल प्रयास किया है। बीते कुछ दिनों में दुनिया के देशों से कच्चा तेल और एलपीजी से भरे जहाज भारत आए हैं। युद्ध के लगभग 25 दिन हो चुके हैं और भारत ने विश्व के कई देशों के मुकाबले स्वयं को संभाला है, और अगले एक पखवाड़े तक भारत इसके असर को हर तरफ से रोके रखने के लिए तैयार है। प्रयास यह है कि, कच्चा तेल और एलपीजी से भरे जहाज भारत आए। किंतु स्थितियां विपरित रही तब माना जा रहा है कि एक पखवाड़े के बाद युद्ध के दुष्प्रभाव से उपजे संकट का सामना भारत देश को करना पड़े। ऐसे में एकजुटता बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुधवार को बुलाई है, जिसमें पश्चिम एशिया में युद्ध से उत्पन्न संकट का सामना करने के लिए सरकार सभी दलो से सहमती बनाने के लिए प्रस्ताव रखेगी। बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर उपस्थित हो सकते हैं वहीं रक्षामंत्री राजनाथसिंह इस बैठक की अध्यक्षता कर सकते हैं। युद्ध से बनी वैश्विक परिस्थिति अगर लंबे समय तक बनी रही तब विश्व के लिए गंभीर दुष्परिणाम तय है, इसीलिए भारत ने जो भी प्रयास बीते समय में किए हैं, उनको और गति दे रहा है। विषम और विपरित परिस्थितियों से बचने के लिए प्रधानमंत्री ने कहा है कि आने वाले समय में युद्ध से उत्पन्न यह संकट हमारे देश की बहुत बड़ी और कठीन परिक्षा लेने वाला हो सकता है, और इस परिक्षा में सफलता पाने के लिए राज्यों का सहयोग उसकी वैचारिक सहायता की भी बहुत आवश्यकता है। राज्यों को चाहिए की वह उपद्रवियों, भ्रामक विचार गढ़ने और फैलाने वाले तत्वों को इस संकट का लाभ उठाने के प्रति चेतावनी देते हुए जमाखोरी और कालाबाजारी करने पर त्वरीत कार्रवाई करे, और नागरिको के लिए आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपुर्ति को प्राथमिकता में रखे। प्रधानमंत्री ने देश में कोरोना काल का उदाहरण देते हुए कहा है कि जिस तरह कोरोना काल में पूरा भारतीय समाज एक जुट हुआ और राज्यों ने सहयोग कर एक मॉडल प्रस्तुत किया उसी प्रकार टीम इंडीया के रुप में कार्य करने की आवश्यकता बताई है। मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने प्रेस कांफ्रेस में बताया कि 47,000 टन एलपीजी से लदा जहाज जग वसंत 26 मार्च गुरुवार को कांडला बंदरगाह पहुंचेगा, और 45,000 टन एलपीजी से लदा पाइन गैस जहाज 27 मार्च शुक्रवार को मंगलौर बंदरगाह पर पहुंचेगा। इन दोनों जहाज ने होमुर्ज से निकलते समय ईरानी तट के करीब से नया रुट अपनाया था और भारतीय नौसेना की निगरानी में वहां से सुरक्षित निकाले गए। जग वसंत पर 33 और पाइन गैस पर 27 भारतीय नाविक सवार थे। सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया है कि स्थिति चिंताजनक है किंतु घरेलु उत्पादन बढ़ा दिया गया है। भारत में प्रतिदिन औसतन 80 से 90 हजार टन एलपीजी की खपत होती है। जिसकी आपुर्ति के लिए सरकार के प्रयासो में सफलता दिख रही है, जनता अपवाहो पर ध्यान न दे और भ्रामक बातों में आ कर घबराहट में सिलेंडर बूकींग न करे। मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार ने बताया है कि होमुर्ज के पश्चिम हिस्से में अभी भी 20 भारतीय जहाज फंसे हुए है, जिनमें 504 नाविक हैं। ये सभी सुरक्षित है और लगातार दुवास के सम्पर्क में है। होमुर्ज में 5 एलपीजी जहाज है जिनमें एक जहाज का जल्द ही वहां से निकलने की संभावना है। सुत्रो के अनुसार शेष जहाजो को भी शीघ्र ही वहां से निकालने की संभावनाएं है।

बहरहाल बेलो की लड़ाई में बागड़ की हानि हो रही है, ईरान- इजरायल और अमेरिका युद्ध से पूरे विश्व में गंभीर उर्जा संकट जन्म ले रहा है। संकट से निपटने के लिए समाज को संयम रखते हुए साहस दिखाना है और भारतीयता का ध्यान रखते हुए आवश्यकता अनुसार ही खपट करे। भारतीय समाज हर चुनौतियों के लिए तैयार रहे।

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