दैनिक दिहाड़ी पर भी रेग्युलर के समान करते हैं काम ” अधेड़ उम्र में पहुंच गए हैं अधिकांश अतिथि विद्वान।

मोहन सरकार से अतिथि विद्वान आशान्वित :-‘ ‘

मध्य प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों के अतिथि विद्वान मोहन सरकार से आशान्वित दिखाई दे रहे हैं। ये चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से भी कम मानदेय में प्रति कालखंड व कार्यदिवस की दिहाड़ी में लंबे समय से रेग्युलर फैकल्टी के समान सेवा देते आए हैं। जिसके कारण अधिकांश अतिथि विद्वान अधेड़ उम्र में पहुंच गए हैं। अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह भदौरिया, डॉ. अमिताभ मिश्रा, डॉ. यशकुमार सिंह, डॉ. अजब सिंह राजपूत, डॉ. बीएल दोहरे, डॉ. संजय पांडे, मीडिया प्रभारी शंकरलाल खरवाडिया आदि सीएम डॉ. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार की और अपने सुरक्षित भविष्य के लिए टकटकी लगाए देख रहें हैं।वास्तव में वर्ष 2017 की सहायक प्राध्यापक भर्ती में मात्र 5 प्रति अनुभव लाभ मिलने के कारण नाममात्र के अतिथि विद्वान ही चयनित हो पाए थे। वर्ष 2022 की भर्ती में भी यही स्थिति रही। 2024 की भर्ती में इन्हें जरूर 25 प्रतिशत कोटा मिला। लेकिन उसमें भी एक वर्ष तथा 20 वर्ष अनुभवी को एक जैसा लाभ दिया गया। जिसके कारण अधिकांश अतिथि विद्वान पिछड़ गए और नवीन उम्मीदवारों से प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो गया।अनेकों 55 से 60 साल के होने से ओवरएज हो गए हैं। कुछ की आयु तो 65 वर्ष होने से व्यवस्था से बाहर भी हो गए हैं। करीब 50 से 60 अतिथि विद्वान निराशा, अनिश्चित भविष्य, गंभीर बीमारी, आर्थिक परेशानी, बार – बार फालेन आउट करना आदि की वजह से मर भी चुकें हैं।

हालांकि इनको हरियाणा पेटर्न पर सामाजिक सुरक्षा देने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने कमेटी गठित कर दी है। अब इन्हें मोहन सरकार से क्या मिलता है। इसका सभी को बेसब्री से इंतजार है। मध्य प्रदेश अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह भदौरिया ने बताया कि हमारी एक टीम 13 जनवरी को उच्च शिक्षा विभाग के कमिश्नर प्रबल सिपाहा और एसीएस अनुपम राजन से मिली है। जिन्होंने पॉलिसी पर काम चलने का आश्वासन दिया है।

संघर्ष मोर्चा के मीडिया प्रभारी शंकरलाल खरवाडिया ने भी इस बारें में जानकारी दी कि अधिकांश अतिथि विद्वान पारिवारिक व सामाजिक जिम्मेदारी, अधेड़ आयु और आर्थिक समस्या, कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण नियमित भर्ती से वंचित हो गए हैं। अतः अब हम सभी मोहन सरकार से अपने सुरक्षित भविष्य का इंतजार कर रहे हैं।

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