झाबुआ कॉलेज में वर्मी कंपोस्टिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम।

प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस,शहीद चंद्रशेखर आजाद, शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय झाबुआ में प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान ( पीएम उषा) सॉफ्ट कंपोनेंट 3 के अंतर्गत दिनांक 12 जनवरी 2026 से 19 जनवरी 2026 तक प्राणिशास्त्र विभाग द्वारा उद्यमिता विकास केंद्र मध्य प्रदेश शासन भोपाल के सौजन्य से वर्मी कंपोस्टिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन के अवसर पर डॉ. वी के सिंह मुख्य अतिथि व मुख्य वक्ता साइंटिस्ट सॉइल साइंस कृषि विज्ञान केंद्र झाबुआ रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था प्रमुख प्राचार्य डॉ जे सी सिन्हा द्वारा की गई। विशेष अतिथि के रूप में डॉ संजू गांधी राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष ,डॉ जी. सी. मेहता वाणिज्य विभागाध्यक्ष, डॉ जे एस भूरिया समाजशास्त्र रहे।


इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की सार्थकता के बारे में डॉ जे सी सिन्हा ने विद्यार्थियों को कहा कि हमारा जिला किसान बहुल जिला है जहां पर 85% किसान भाई-बहन खेती के द्वारा अपना जीवन यापन करते हैं यदि वे वर्मी कंपोस्ट को जैविक खाद के रूप में उपयोग में लाते हैं तो फसलों की अधिक से अधिक पैदावार को प्राप्त कर सकते हैं। डॉ जी सी मेहता ने विद्यार्थियों को बताया कि वर्तमान में रासायनिक खाद के उपयोग से जो फसल प्राप्त की जा रही है वह शरीर में कैंसर जैसे रोगों को उत्पन्न कर सकती है अतः वर्तमान पीढ़ी जैविक खाद के रूप में वर्मी कंपोस्ट का उपयोग करके ऑर्गेनिक फार्मिंग कर सकती है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विषय विशेषज्ञ डॉ वी के सिंह ने वर्मी कंपोस्ट प्रोडक्शन टेक्निक्स के बारे में विस्तार से जानकारी दी। आपने बताया कि बायो वेस्ट मैनेजमेंट का सर्वश्रेष्ठ उपाय है वर्मी कंपोस्ट जिसके द्वारा मृदा की उर्वरता, मृदा के स्वास्थ्य और उसके पोषक तत्वों को बनाए रखा जा सकता है। आपने झाबुआ के वर्मी कंपोस्ट यूनिट की विस्तृत जानकारी दी। करीब 40 यूनिट आपके केंद्र में स्थापित है और लगभग 200 से 400 किसान आपके केंद्र के माध्यम से वर्मी कंपोस्टिंग का कार्य कर रहे हैं।

कंपोस्टिंग करते समय रखने वाली सावधानियां ,बायो वेस्ट का मैनेजमेंट, वर्मी बेड का निर्माण, केंचुए खाद का कंपोजीशन, कंपोस्ट बनाने वाले केंचुए का जीवन चक्र और उसकी प्रजातियां जैसे आइसेनिया फेटिडा,आइसेनिया एन्द्रेई, यूड्रीलेस यूजेनिया, पेरियोनिक्स एक्सकेवेटस के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की । आपके सेंटर पर वर्मी कंपोस्ट के साथ-साथ वर्मीकल्चर भी किया जाता है। वर्मी वाश बनाने की तकनीकी और कंपोस्ट के मार्केटिंग और उसका उत्पादन कैसे किया जा सकता है उसकी जानकारी दी । इसके माध्यम से जैविक ग्राम भी बनाया जा सकता है।

इस अवसर पर डॉ वी एस मेडा,( पी एम ऊषा प्रभारी) डॉ अंजना अलावा, डॉ सुरेंद्र सिंह अलावा, डॉ विनोद भूरिया ,डॉ जेमाल डामोर, डॉ बी. एस डामोर, डॉ प्रदीप कटारा, डॉ अनंत सिंह, डॉ महिमा देवड़ा, डॉ मनीषा सेमलिया समिति सदस्य डॉ रीना गणावा विभागाध्यक्ष जूलॉजी, डॉ जूली जैन, श्री पावर सिंह मेडा,श्री राजेश चौहान विद्यार्थी खुशबू भूरिया रितु चौहान ,सुनिधि बाला ,शुभम, बंशीलाल उपस्थित रहे । कार्यक्रम का संचालन डॉ रीता गणावा ने किया आभार मनीषा सिसोदिया ने माना।

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