भारत में बढ़ते भ्रष्टाचार का युवा पीढ़ी पर दुष्प्रभाव, अधिनियम में चाहिए सख्त बदलाव।

रिंकेश बैरागी,

मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले में माह दिसंबर 2025 में एक शासकिय कर्मचारी 15 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ाया गया था, जिसके बाद झाबुआ कलेक्टर ने अपने सम्मान को बनाए रखने के लिए शिक्षा से जुड़े तीनों विभागो की लंबीत फाईल्स को देखना शुरु कर दिया। जनजाति कार्य विभाग, जिला शिक्षा विभाग, और डीपीसी कार्यालय में विस्तृत निरिक्षण किया था। इस निरिक्षण के दौरान जनजाति कार्य विभाग की सहायक आयुक्त अनीधिकृत रुप से जिला मुख्यालय पर अनुपस्थित रही। निरिक्षण में उपलब्ध अभिलेख, लंबीत प्रकरण, समयबद्ध निराकरण के साथ कार्यालयीन व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की गई।
मध्यप्रदेश का झाबुआ जिला जो की जनजातिय क्षेत्र है, जहां विकास के नाम पर बरसो से करोड़ो का बजट आवंटन किया जाता है मगर यहां धीमी गति के विकास में भ्रष्टाचार के बहुत से ब्रेकर पल-पल पर आते हैं, जिसकी वजह से विकास की दर अत्यंत कमजोर होती है। जनजाति क्षेत्र में लोगों का पलायन पर जाने का एक कारण प्रशासनिक भ्रष्टाचार भी हो सकता है। भ्रष्टाचार के कारण कई सारे कार्य ऐसे हो जाते हैं जो योजनाओं में दिखाई देते हैं मगर होते नहीं है।
लोकायुक्त के बढ़ते छापो से लगता है कि, सरकार द्वारा भ्रष्टाचार रोकने के किए गए प्रयासों का अर्थ निर्थक सा होता जा रहा है। कुछ जागरुकता के कारण और मोबाइल के कारण कुछ लोगों में इतना ज्ञान आया है कि, वे भ्रष्टाचार के विरोध में खड़े हो सके और ऐसे लोगों की शिकायत कर लालची अधिकारी को भ्रष्टाचार के आरोप में दोषी बनाते हैं। मगर अधिनियम की लंबी प्रक्रिया में उलझे प्रकरण के कारण अधिकांश भ्रष्टाचारियों के केस सालो साल चलते हैं जिन पर निर्णय कभी तो ऐसे समय आते हैं जब अधिकारी सेवामुक्त हो चुका होता है या कभी तो वह स्वर्गवासी हो जाता है। अब ऐसे में सजा किसे सुनाए और किससे दण्ड का भूगतान करवाए फिर जिसे सजा हो भी जाती है तो उसका किस पर क्या प्रभाव। सारा कार्य, सारी कार्यवाही जैसे निर्थक साबित हो रही होती है।
लोकायुक्त से छापे पड़ने का बाद जब भ्रष्टाचारी रंगे हाथों पकड़ाता है तब भी गिरफ्तारी के बाद लंबी कार्यवाही चलती रहती है। फिर मुकदमा भी वर्षो निकाल देता है। बुद्धीजीवियों का मत है जब लोकायुक्त ने आरोपी को पकड़ा जिसके हाथों में रंगीन नोट थे जिनको धुलवाने पर उसके हाथ रंग वाले हुए तभी तो वह गिरफ्तार किया गया। स्पष्ट है कि उसने रिश्वत मांगी थी तभी व्यक्ति रिश्वत का रुपया लेकर रिश्वत मांगने वाले के पास गया। रिश्वतखोर ने रिश्वत ली और वह आरोपी बना। उसे गिरफ्तार कर उसे सजा दी जानी चाहिए…
प्रशासनिक सेवा परिक्षा की तैयारी कर रहें युवा आए दिन समाचार पत्रो में भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत लोकायुक्त द्वारा की गई कार्यवाही के समाचार पढ़ते होंगे परंतु उन कार्यवाही में कितने भ्रष्टाचारियों को सजा मिली इसकी खबरे पढ़ने को युवाओ को नहीं मिल पाती क्योंकि प्रकरण इतने लंबे होते चले जाते हैं कि समय बदल जाता है।
नव युवको में इसका प्रभाव घातक हो सकता है। इसके कारण युवा आसली, मक्कार, लालची, और दुराचारी बन सकते हैं। सरकार द्वारा दिए गए धन का उपयोग भ्रष्टाचार की बागड़ में लगेगा तो वहां के कांटों में वह भी नशीला होकर चूभनकारी हो जाएगा। सरकारी कार्यालय में फाईल को लंबे समय से होना अधिकत्तर तो यही दर्शाता है कि उस फाइल पर वजन नहीं रखा गया था यहां वजन शब्द का अर्थ स्पष्ट है कि रिश्वत नहीं दी गई थी। इस रिश्वत के कारण ही समाज में भ्रष्टाचार का दुष्प्रभाव यह है कि, निर्धन व्यक्ति के कार्यों में महिनों लग जाते हैं और धनवान अपने कागजी कार्य आसानी से समय रहते, या उससे पहले करवा लेता है। दुष्प्रभाव का दूसरा स्वरुप यह भी होता है कि सामाजिक कार्यो में लंबा समय लग जाता है। ऐसे अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए जा सकते हैं जहां निर्माण कार्य चाहे, सड़क, अस्पताल, या स्कूल, या फिर सरकारी कार्यालय हो समय पर उनका निर्माण कार्य पूर्ण होता ही नहीं है। अनेक उदाहरणों में एक उदाहरण दाहोद से इंदौर रेल्वे लाइन का भी है जिसको बरसो बरस हो गए मगर निर्माण कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हो पाया है। इसी कारण से भी नव युवा पीढ़ी को सरकार से खिन्नता रहती है, नाराजगी रहती है। पारदर्शिता नहीं होने पर युवा मतदान के समय नोटा का उपयोग करते हैं।
सरकार को अपनी प्रतिष्टा को बनाए रखने के साथ अपने सम्मान में बढ़ोत्तरी भी करवानी है तो सरकार को चाहिए कि प्रशासनिक कार्यों से भ्रष्टाचार शुन्य हो जाए जिसकी शुरुआत सरकार ने की तो मगर न तो उसमें तेजी है न ही उसमें सख्ती है।
बहरहाल, प्रशासनिक कार्य ऑनलाइन किए जाने के पश्चात भी लोभी पृवत्ति किसी न किसी जुगाड़ से उसमें भी भ्रष्टाचार कर ही लेती है। इसेक लिए भी सरकार को संज्ञान में लेकर एक पद्धति में नए पारदर्शी नियम समय सीमा में बनाकर उन्हें लागु करना चाहिए। साथ ही भ्रष्टाचार अधिनियम के अंतर्गत लोकायुक्त द्वारा गिरफ्तार किए गए भ्रष्टाचारियों के लंबीत प्रकरणों पर त्वरित कार्यवाही कर उनको सजा दिलानी चाहिए ताकि समाज में सकारात्मक प्रभाव से युवा उत्साहित रहे और भ्रष्टाचार को समाप्त करने में सहयोग करें।

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