पंडित हरिओम जी दवे ने किया झूठे सनातनी और चोला ओढ़े ढोंगियों का पर्दा फास। धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो।

मैं हरिओम दवे पिता चतुर्भुज दवे अध्यक्ष गीता भवन ट्रस्ट रानापुर नगर के पुरे हिन्दू समाज को आज एक विशेष जानकारी देना चाहता हूँ कि में पिछले 50 वर्षों से गीता भवन ट्रस्ट का इंदिरा बेटी जी के द्वारा बनाए गए ट्रस्ट का अध्यक्ष हूँ , मुझे पचास वर्ष पूर्व इंदिरा बेटी जी ने इस ट्रस्ट का अध्यक्ष नगर के सभी समाज जन के सामने सर्व सहमती से बनाया था , आज इतने वर्षो तक मेने गीता भवन कि अमूल्य धरोहर कि देख रेख और व्यवस्था बेटी जी के आदेश पर संभाली थी , परन्तु आज मेरी उम्र 85 वर्ष हो गई है और पुराने कई ट्रस्ट के सदस्य स्वर्ग लोक सिधार गए है ,

मेने मोखिक रूप से सागरमल पोरवाल इसके सदस्य थे तो उनके पुत्र कमल पोरवाल को समिति में कार्य करने हेतु कहा था और कांतिलाल हरसोला के पुत्र महेश हरसोला को भी मोखिक रूप से जोड़ लिया इन्हें कोई नियुक्ति पत्र नहीं दिया था क्यों कि में इन पर भरोसा करता था , मेने एक मीटिंग लगभग 15 दिन पूर्व मेरे घर पर रखी थी , जहां पर मेने महेश हरसोला ,और कमल पोरवाल को बुलाया, और इनसे बात की के हम इतने वर्षो से इसके अध्यक्ष ,उपाध्यक्ष ,कोषाध्यक्ष है इतने वर्षो सेवा दी गीताभवन कि अब हम सब ट्रस्ट से हट जाए और नई पीढ़ी को इस कार्य को सोप दे ,मेरे मन के भाव थे कि हर समाज से 2 लोगो को इस ट्रस्ट में जोड़ कर सभी समाज के योग्य व्यक्तियों को जोड़ा जाए।

ये बात सुनकर ये मुझसे मेरे घर पर विवाद करने लगे और कहने लगे कि हम ट्रस्ट से नहीं हटेंगे ,मेने कहा कि आपके पिता थे तो मेने आपको जोड़ा था ,क्या अब आपकी संतान को बनाओगे , ये गलत है , मेने इनसे कहा कि क्या sp का बेटा sp बन जाता है क्या , उसे भी परीक्षा पास करना होती है ये ट्रस्ट है इसके कुछ नियम है , इसमें हर तीन साल में चुनाव होते है जो अभी तक नहि हुए तब ये मुझसे बहस करने लगे और वहा से मेने इन्हें जाने के लिए कह दिया , और जाने के पूर्व इन्हें बताया कि भगवान कृष्ण जन्मोत्वस का कार्यक्रम ब्राहमण समाज कि मीटिंग में तय हुआ है जिसे गीता भवन में करने का भाव है तो ये सुनकर वहा से चले गए , पिछले कई वर्षो से इस मंदिर में कोई बड़ा आयोजन नहीं हुआ है और इस बार धूम धाम से प्रभु का जन्म महोत्सव मनाया जाएगा बस यह भाव ब्राहमण समाज का था उसमे ये कही से कही तक ब्राहमण समाज के किसी सदस्य के द्वारा एसी कोई बात नहीं कही गई कि अन्य समाज इसमें नहीं आ सकता है , और वहा भजन करने वाली माता व् बहनों को कोई मना नहीं किया कि आप नहीं आ सकते यह झूठ फेलाया जा रहा है भगवान् तो सबके है ब्राहम्ण समाज इस आयोजन को सार्वजनिक रूप से ही मनाना चाहता था कोई मंदिर में किसी के आने पर रोक नहीं लगा सकता है , हम सब हिन्दू है और पूरा हिन्दू समाज इस कार्यक्रम में शामिल हो सकता है , परन्तु सनातन का नाम लेकर एक एसा झूठ कुछ विशेष लोगो के द्वारा फेलाया जा रहा है , जिसमे महेश हरसोला का पुत्र निलेश हरसोला जिसका इस ट्रस्ट में कोई नाम नहीं है कोई लेना देना नहीं है वह खुद गीता भवन में भजन करने वाली महिलाओ के घर गया और कहा कि आप आगे रहो हम पीछे रहेंगे खर्चा में और मेरा परिवार करेगा और ब्राहम्ण समाज को कृष्ण जन्मास्टमी गीता भवन में नहीं मनाने देना है क्यों कि ये खा जाएंगे तो क्या पूरा हिन्दू समाज ये बताए कि कोई कार्यक्रम करने से गीता भवन केसे खा सकता है आप समझदार है तो सोचे निलेश हरसोला ने सबसे पहले षड़यंत्र कि शुरुआत कि सोसल मिडिया पर राखी का त्यौहार होने के पहले ही जन्मास्टमी कि चिंता कर ब्राहमण समाज के सुचना करने से पूर्व ही 10 दिन पहले निलेश हरसोला को क्यों हो गई थी।

उसने एक मेसेज बनवाकर रामायण मंडल के एक सदस्य से तुरंत बात कर सुन्दर काण्ड करने का आदेश दिया , और वो सदस्य राम भक्त है पर सत्य नहीं बोल सकता है इनके दबाव में , निलेश हरसोला ने एक रसीद तुरंत काटी गीता भवन की सुन्दर काण्ड कि , मुझ अध्यक्ष कि बिना जानकारी के उस पर मेरे हस्ताक्षर भी नहीं है क्यों कि गीता भवन का रसीद कट्टा मेने विश्वास कर इसके पिता महेश हरसोला को कई वर्षो से सुपुर्द कर रखा है ,आखिर निलेश हरसोला ने खुद के घर बैठकर सुन्दर काण्ड कि रसीद खुद केसे बना लि ये ब्राहमण समाज को आयोजन नहीं करने देने का पहला षड्यंत्र था फिर खुद निलेश हरसोला ने एक आवेदन ब्राहम्ण समाज के खिलाफ शांति भंग करने का थाने पर देने का बनवाया और महेश हरसोला ,कमल पोरवाल ,निलेश हरसोला मेरे पास शाम 5 बजे मेरे गार्डन पर मुझसे हस्ताक्षर करवाने आए जब मेने यह आवेदन पड़ा तो इनसे मेरी तीखी बहस हुई और इनको कहा कि तुम ब्राहम्ण समाज के जन्मास्टमी कार्यक्रम को क्यों बिगाड़ रहे हो ,आयोजन से तुमको परेशानी है तो बैठकर बात करते है में उन्हें बुलवाता हूँ , तुम थाने का आवेदन लेकर घूम रहे हो ये गलत है , और मुझे मालूम पड़ी है कि निलेश भजन करने वाली माताओं बहनों को आगे कर खुद पीछे से साजिश कर रहा है , जब ये मेरे पास ब्राहमण समाज के खिलाफ आवेदन पर हस्ताक्षर करवाने आए तो मेने इनसे कहा कि तुम्हे शर्म आन चाहिए ,वहा ब्राह्मण समाज के सभी लोग मोजूद थे और वहा सभी ने इन तीनो से कहा कि आप एसा क्यों कर रहे हो थाने का आवेदन देखकर ब्राहमण समाज के सभी लोगो से बहस हुई ब्राहमण समाज ने इन तीनो से पूछा कि तुम क्यों ब्राहमणों को बदनाम कर रहे हो तुमको इस आयोजन से क्या परेशानी है इनसे बात हुई फिर निलेश हरसोला से स्वयं ब्राहम्ण समाज के सभी लोगो के सामने स्वीकार किया कि यह खेल मेने खेला था मेरी भावना जाग गई थी ,वहा सभी ने यही कहा कि निलेश भाई ये भावना आज ही क्यों जगी आपकी फिर निलेश हरसोला ने जितेश राठोड को वहा मेरे और समस्त ब्राहमण समाज के सामने फोन कर सुन्दरकाण्ड अगले दिन करने के लिए कहा और जितेश भाई तुरंत मान गए इससे यह सबको समझना होगा कि इसका पूरा खेल निलेश हरसोला खेल रहा था और ये वहा से भाग गए ,जेसे ही ब्राहमण समाज के सभी लोगो ने उस आवेदन को पड़ा तो सबको घुस्सा आया और निलेश से सवाल किये तो कोई जवाब नहीं था इनके पास , फिर उसके बाद निलेश हरसोला ने रात्रि में 10 बजे गीता भवन पर मेरी बिना जानकरी के बोर्ड लगवाया जिसकी मुझ अध्यक्ष को कोई जानकारी नहीं ,वंहा निलेश हरसोला ने एक ताला भी लगवाया , मुझे निलेश हरसोला का अति उत्साहित होकर ये कार्य करना मुझे ठीक नहीं लगा क्यों कि वो ट्रस्ट में कुछ भी नहीं है और फिर पुरे नगर में महेश हरसोला ,नटवर हरसोला,निलेश हरसोला , ने एक भ्रम समाज के घर घर जा कर फेलाया कि ब्राहम्ण समाज इसे खा जाएगा ,और ब्राह्मण समाज को बदनाम करने का षड़यंत्र इन चारो के द्वारा रचा गया , कुछ समाज के भ्रमित लोग इनकी बातो में आ गए है ,मेने जब इनको ट्रस्ट से हटाने कि बात कि तब से ये बोखला कर सनातन समाज का नाम लेकर अन्य लोगो के कंधे पर बन्दुक रख कर ब्राहमणों से लड़वाने कि साजिस रच रहे है ,इनके फेलाए भ्रम में कुछ मंद्बुधि लोग आ गए है ,परन्तु जो बुद्धिजीवी समझदार लोग वो इनके झांसे में नहीं आए ,मेरे पास उनके फोन आए थे मेने उन्हें सत्य से अवगत करवाया , इन लोगो को ट्रस्ट से हटने का इतना दुःख क्यों है क्यों कि करोडो कि संपत्ति पर ये अपना और अपने परिवार का अधिकार करना चाहते है मेने इनके मुंह पर यह कह दिया कि मेरे मरने के बाद तुम अपने परिवार को ही इसमें जोड़ कर आपस में इस सम्पति को बाटने कि योजना मत बनाओ , तो ये मिलकर मुझे ट्रस्ट के अध्यक्ष पद से हटवाने के लिए पुरे नगर में नटवर हरसोला ,महेश हरसोला ,निलेश हरसोला ,कमल पोरवाल सनातन का नाम इस्तेमाल कर हिन्दू समाज को आपस में लड़वाने का खेल खेल रहे है ,में स्वयं इस पद को छोड़ कर पुरे हिन्दू समाज के सभी लोगो को बुलवाकर इस कार्य को इस धरोहर को ईमानदार लोगो को सुपुर्द करूँगा ,ये धरोहर पुरे नगर कि है में स्वयं चाहता हूँ कि इस ट्रस्ट में हर समाज के लोग रहे में अपने स्वयं के विवेक से कई समाज के समझदार लोगो के नाम बातचीत कर मे स्वयं तय करने में लगा हूँ और सभी से सलाह लेकर इस काम को कर रहा हूँ जो आगे इसकी व्यवस्था संभालेंगे जेसे राठोड समाज से नारायण जी राठोड ,बंशी भाई राठोड ,जेन समाज से प्रकाश अग्रवाल ,नटवर भाई पिठवा , चंद्रसेन कटारिया , अशोक नागोरी ,तरुण जैन ब्राहमण समाज से भीम भाई दवे ,दिलीप भाई उपाध्याय ,निशिकांत जोशी ,पोरवाल समाज से राजेश पोरवाल ,जगदीश पोरवाल , माली समाज से ,कान्ति माली,रमेश माली ,सोनी समाज से रमेश जी सोनी ,ओम सोनी,लक्ष्मीकांत सोनी ,लोहार समाज से सुरेश पंचाल पार्षद ,विनोद पंचाल , प्रजापत समाज से कांति प्रजापत ,कनु प्रजापत का नाम एसे सभी कि सलाह से यह सूचि तेयार कर रहा हूँ ,जब इनको मेने नए सदस्य जोड़ने को कहा तो ये भड़क गए और सनातन समाज का नाम लेकर दुसरो के कंधे पर बन्दुक रखकर ब्राहम्ण समाज को अन्य समाज से लड़वाने का षड्यंत्र करने लगे और पुरे नगर में जहर घोलने का कम करने लग गए ,जब कि इन लोगो ने सबसे ज्यादा सरकारी सम्पति पर कब्ज़ा कर रखा है पुरे समाज को यह बात मालूम है ,परन्तु ब्राहमण समाज ने उसका कभी विरोध नहीं किया ब्राह्मण समाज हमेशा धर्म कि रक्षा के लिए प्राण दान देने वाला समाज है ,दधिची ने अपनी हड्डियों का दान दे कर असुरो का वध करवाया इंद्र के हाथो , मेरी उम्र 85 साल है कभी ब्राहमण समाज ने नगर कि शांति भंग नहीं कि पूरा हिन्दू समाज ये बात जानता है ब्राहमण समाज का सभी समाज के लोग सम्मान करते है और प्रेम भाव से रहते है. मेरी बात सब मानते है यही बात इन चारो को चुभ रही है और ब्राहम्ण समाज के विरुद्ध ,मेरे विरुद्ध ये षड़यंत्र रच रहे है और ये ब्राहमण समाज के खिलाफ आवेदन देने जा रहे थे और ये आवेदन मेरे पास लाए तब फस गए अब इनके पास एक ही रास्ता बचा पुरे नगर में झूट का सहारा लेकर ब्राहमण समाज के कुछ युवाओ के नाम लेकर विवाद करने का खेल खेल रहे है , ब्राहमण समाज ने कभी किसी का कोई अहसान नहीं लिया और नहीं किसी समाज या सरकार कि सम्पति हड़पी ,लोगो ने तो वो भी किया है पर हमने कभी किसी का विरोध नहीं किया ,गीता भवन का हिसाब कमल पोरवाल के पास रहता है मेने कभी इनसे हिसाब नहीं माँगा , जो करते थे महेश हरसोला और कमल पोरवाल करते थे , बैंक में जाकर भी खिलाफ आवेदन देकर आए थे कि हरिओम दवे जी पेसे नहीं निकाले मुझे भगवान ने इतनी सम्पति का स्वामी बनाया है कि वही 100 साल तक खाओ तो खत्म न हो ,मुझे अध्यक्ष पद से हटने पर कोई दुःख नहीं है में अपनी इच्छा से हटने तेयार हुआ और जब इनको हटने के लिए कहा तो इन दोनों महेश ,और कमल को दुःख क्यों इनके परिवार के लोग नटवर हरसोला और निलेश हरसोला इतने परेशान क्यों हो रहे कही ये गीता भवन का अधिपत्य स्वयं तो नहीं करना चा रहे ,पुरे समाज को यह खेल समझना होगा , आज इन्होने मेरे और ब्राहम्ण समाज के खिलाफ यह भ्रम समाज में फेलाया कि ब्राहम्ण समाज गीता भवन खा जाएगा . तो इनसे मेरा भरोसा उठ गया है ,अब में स्वयं सब समाज के लोगो को यह भी बताना चाहता हूँ कि में पचास वर्षो से यहा का अध्यक्ष हूँ में एसा गलत कार्य करना चाहता तो पहले कर सकता था ,परन्तु आज तक मेने यह गलत काम नहीं किया और नहीं इन चारो को करने दूंगा . ये सपने देख रहे है कि कांतिलाल जी हरसोला के बाद उनका पुत्र महेश हरसोला अध्यक्ष बने उसके बाद निलेश हरसोला बन जाए , सागरमल पोरवाल के बाद कमल पोरवाल ,उसके बाद उनका पुत्र बने ,सागरमल राठी के बाद दिलीप राठी ,उसके बाद मयंक राठी उसके बाद उसका पुत्र तो यह गलत है इस ट्रस्ट में परिवार वाद नहीं चलेगा ,और ये अगर स्वाभिमानी है तो मेरे साथ खड़े रह कर हिन्दू समाज में से किसी योग्य को पद दे में खुला समर्थन करता हूँ ,क्या इनमे इतनी ताकत है ,इनकी निगाहे करोडो कि सम्पति पर है . हिन्दू समाज को जानकरी चाहिए तो मुझसे आकर मिले में बताऊंगा सत्य .सत्य परेशान होता है पराजित नहीं ,मेने सागरमामा के कहने पर ही आगे के ट्रस्ट के प्लाट बेचे थे जिनका सोदा स्वयं सागर मल जी राठी ने खुद के घर पर किया था और पैसा भी वही रखा था ,जिसे गीता भवन के निर्माण कार्य में लगवाया गया था ,रानापुर अस्पताल को भी जमीन नगर हित के लिए 5 बीघा दी थी और मेने स्वयं सभी पुराने ट्रस्ट के सदस्यों के कहने पर शासन को दी थी . में अगर गलत करना चाहता तो इतने वर्षो में वहा सब लोगो के प्लाट दिए थे ट्रस्ट ने , ब्राहमण समाज के किसी भी व्यक्ति को प्लाट नहीं दिया और नहीं समाज को दिया अगर में गलत होता तो 50 साल पहले भी वहा मेरे खुद के या परिवार के नाम से कोई प्लाट रख सकता था पर नहीं रखे जो प्लाट आज करोडो के है ,पर मेने एसा नहीं किया मेने गोशाला कि जमींन बचाने के लिए केस लड़े अपने स्वयं के पेसो से और केस को जीता स्वयं लोगो के पत्थर खाए जिसके गवाह गोपाल जी हरसोला रानापुर में है आज गोशाला और गीता भवन कि इतनी सम्पति है जिसे कुछ लोग परिवार वाद का खेल खेल कर खुद खाना चाहते है ,में पुरे हिन्दू समाज के सामने सीना ठोक कर बोल रहा हूँ कि ये गीता भवन पुरे हिन्दू समाज का है और ये एक ही परिवार के सदस्य जिन्हें में इमानदार समझता था उन्होंने मेरे विश्वास को तोडा है अगर वे सच्चे है तो पुरे हिन्दू समाज के सामने अपना इस्तीफा लिख कर दे दे , और कहे कि हम कभी इसमें सदस्य न रहेंगे और नहीं हमारा परिवार रहेगा .आप मेसे कुछ लोग जो हिम्मत रखते है तो चोराहे पर खड़े रख कर पूछे ये लिख कर देने कि ताखत रखते है क्या . पुरे गाँव में जहर घोलकर लड़वाने वाले इन लोगो से पूरा हिन्दू समाज सजग रहे . पूरा हिन्दू समाज जानता है कि में किसी भी धार्मिक आयोजन के लिए जो मेरे पास जो भी आता था में उसे कोई रसीद कटवाने का नहीं बोलता था कुछ दिनों पूर्व मेरे गार्डन पर RSS का कार्यक्रम रखा गया था मेने एक पैसा भी उनसे नहीं माँगा क्यों कि में हिन्दू हूँ । अध्यक्ष

गीता भवन ट्रस्ट रानापुर

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