ड्यूटी के दौरान आए अचानक चक्कर से अतिथि विद्वान की मौत
:-‘ झाबुआ, धार, आलिराजपुर सहित प्रदेशभर से अतिथि विद्वान दे रहें आर्थिक मदद ”
सरकार की तरफ से नहीं मिलता परिवार को रोजगार और आर्थिक सहायता ‘
‘ डॉ. सूर्य प्रकाश साकेत 15 साल से लगातार प्रदेश के अलग-अलग कॉलेजों में जूलॉजी में दे रहे थे सेवा ‘

सरकार की अनदेखी से प्रदेशभर के विभिन्न शासकीय महाविद्यालयों में सेवा देने वाले अतिथि विद्वानों के भविष्य व जीवन पर संकट है। जिसका ताजा उदाहरण सरदार वल्लभ भाई पटेल शासकीय महाविद्यालय देवतालाब जिला मंऊगंज में देखने को मिल रहा है। वहां जंतु विज्ञान विषय में कार्यरत अतिथि विद्वान डॉ. सूर्य प्रकाश साकेत को 11 फरवरी को ऑनड्यूटी कॉलेज में अचानक चक्कर खाकर गिर पड़े। जब डॉक्टर के पास ले गए तो उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। साकेत 38 वर्ष से ज्यादा उम्र के हो चुके थे। वे विगत 15 वर्षों से प्रदेश के अलग-अलग कॉलेजों में अतिथि विद्वान के रूप में सेवा दे रहे थे। उनके परिवार में चार भाई है, पिता का भी देहांत भी गत वर्ष हो चुका है। पूरे परिवार के पालन-पोषण की जिम्मेदारी प्रति कार्य दिवस की अतिथि विद्वान की नौकरी से कर रहे थे। उन्होंने बेहद गरीबी और आर्थिक तंगी में जीवन यापन करते हुए जूलॉजी में पीएचडी की उपाधि हासिल की थी। लंबे समय से अतिथि विद्वान रहने के बाद भी भविष्य सुरक्षित नहीं हुआ था।
सरकार व विभाग किसी भी प्रकार की सहायता नहीं करता :
वास्तव में सरकार व उच्च शिक्षा विभाग की तरफ से ऑन ड्यूटी मौत होने पर भी अतिथि विद्वान के परिवार को किसी भी प्रकार का रोजगार व आर्थिक सहायता नहीं दी जाती है। इससे पूर्व भी 50 से 60 अतिथि विद्वान इसी तरह दुनिया से अब तक जा चुके हैं। जिनके परिवार की सुध नहीं ली गई।
प्रदेशभर के कॉलेजों के अतिथि विद्वान ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से कर रहे मदद :
वहीं झाबुआ, आलिराजपुर, धार जिलें के कॉलेजों में सेवा देने वाले अतिथि विद्वानों में शंकरलाल खरवाडिया, पार्वती भाबर, डॉ. अजय आचार्य, जितेन्द्र सिंह कौरव, डॉ. मानसिंह चौहान, डॉ. सुनील जाट, डॉ. जुली जैन, डॉ. प्राची शर्मा, डॉ. प्रवेश जाटव, डॉ. राजेश पाल आदि सहित प्रदेशभर के कॉलेजों के अतिथि विद्वान मृतक अतिथि विद्वान के परिवार को आनलाइन ट्रांजेक्शन से आर्थिक मदद कर रहे हैं। कोई एक हजार तो कोई पांच रुपए अथवा जिससे जितनी मदद हो सके कर रहे हैं।अतिथि विद्वान बनकर कोई गुनाह कर दिया : मध्य प्रदेश अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह भदौरिया ने इस संबंध में बताया है कि यदि सरकार द्वारा अतिथि विद्वानों के भविष्य लिए ठोस नियम होते तो मृत अतिथि विद्वानों के परिवार को कुछ मिल पाता। ऐसा लगता है कि हमने अतिथि विद्वान बनकर कोई गुनाह कर दिया है। इसलिए सरकार हमारी तरफ ध्यान नहीं दे रही है।
परिवार के किसी एक सदस्य को नौकरी व आर्थिक सहायता की मांग:
नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी शंकरलाल खरवाडिया ने भी दुःख जाहिर करते हुए कहा है कि हम भी इंसान हैं। वर्ष 2002 से उच्च शिक्षा विभाग में नाममात्र के मानदेय में काम कर रहे हैं। फिर भी सरकार मरने वाले के परिवार कुछ नहीं दे रही है। मेरा मोहन सरकार से अनुरोध है कि अतिथि विद्वानों के लिए जल्द से जल्द हरियाणा पॉलिसी लागू किया जाए और अब तक मृत अतिथि विद्वानों के परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी व आर्थिक सहायता प्रदान की जाएं।