अनुपयोगी प्लास्टिक की सड़क करेगी पर्यावरण संरक्षण और समय के साथ श्रम की भी बचत।

नई दिल्लीः

खराब सडकों और गड्ढों से अब जल्द निजात मिलने जा रही है। अनुपयोगी प्लास्टिक का प्रयोग सड़क बनाने में कर रहे केंद्रीय सडक अनुसंक्रांति संस्थान (सीआरआरआइ) ने अब इस दिशा में एक कदम और बढाते हुए रेडीमेड सडक बनाने की शुरुआत कर दी है। इसमें राहत वाली बातें ये भी है कि ये पर्यावरण के लिए तो अनुकूल होंगी ही, इसके प्रयोग से सड़क की उम्र भी दो से पांच गुना तक बढेगी साथ ही समय, श्रम की बचत के साथ लागत भी कम होगी। सीआरआरआइ ने भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के सहयोग से मिश्रित अपशिष्ट प्लास्टिक का उपयोग कर एक शीट और तकनीक के उपयोग से जियोसेल की एक परत तैयार की है। इसमें भी अनुपयोगी प्लास्टिक का उपयोग किया गया है। सीआरआरआइ और ‘बीपीसीएल मिलकर 11. जुलाईं को डीएनडी, फरीदाबाद- केएमपी एक्सप्रेस वे पर 100 मीटर में इस रेडीमेड सड़क को बिछाने की शुरुआत कर रहे हैं। चार से आठ मिमी मोटी इस प्लास्टिक शीट को सड़क बनाने के लिए बिछाकर इसके ऊपर कोलतार मिक्स रोडी बिछा दी जाएगी। इससे सड़क बनाने में तो कम समय लगेगा ही, उसकी मजबूती भी सुनिश्चित होगी। सीआरआरआइ का दावा है यह अब तक का पहला प्रयोग है। अभी तक हम अनुपयोगी प्लास्टिक का प्रयोग सड़क बनाने में करते तो थे लेकिन इसकी मात्रा बहुत कम थी। अव नई तकनीक के तहत प्रति 100 मीटर में 30टन तक प्लास्टिक कचरे का उपयोग हो सकेगा। बता दें कि भारत में प्रति वर्ष 34 लाख टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है। मगर सिर्फ 30% की रीसाइक्लिंग हो पाता है।

दो तरह से प्लास्टिक कचरे का हागा उपयोग: सीआरआरआइ की वरिष्ठ प्रधान विज्ञानी अंबिका बहल के अनुसार पहले प्रयोग के तहत अनुपयोगी प्लास्टिक को एकत्रित कर प्लांट में उसकी शीट बनाकर सड़कों को बनाने में उपयोग किया जाएगा। दूसरे प्रयोग के तहत भी प्लास्टिक कचरे का उपयोग होगा जिसमें जियोसेल नामक परत तैयार की जा सकेगी। इसे सड़क पर अधिक खराब होने वाले स्थान या निचले स्थान पर कोलतार मिक्स रोड़ी डालने से पहले बिछाया जाएगा और इससे सड़क को मजबूती मिलेगी।

50 एमएम की परत डाली जाएगी

सड़क बनाने के लिए प्लांट से तैयार होकर आने वाली प्लास्टिक शीटों को पहले जमोन पर बिछाया जाएगा । उसक ऊपर लगभग 50 एमएम की हाटमिक्स कोलतार व रोड़ो की परत डाली जाएगी । इसके डालने से प्लास्टिक की शीट गर्म होने पर जमीन को पकड़ लेगी और ऊपर से डाली जाने वाली सामग्री में भी अपनी पकड़ बनाएगी और सामग्री के ठंडा होने पर इसमें पत्थर जैसी मजबूती आएगी। इस तकनीक से सड़कों का निर्माण भी सस्ता हो सकेगा। श्रम भी कम लगगा, मजबूती तो होगी ही।

लैंडफिल साइटों पर कूडा बीनने वाले उपयोगी प्लास्टिक को तो उठा लेते हैं जिसकी रीसाइकिलिंग होती है मगर जो प्लास्टिक अनुप्रयोगों हैं, वह री साइकिल नहीं हो पाती ऐसी प्लास्टिक का थी अब सडक बनाने के लिए शीट में उद्योग हो सकेगा । प्लास्टिक की धुलाई सफाई की भी जरूरत नहीं होगी।

अंबिका बहल, वरिष्ट प्रधान विज्ञानी, सीआरआरआइ

सड़कों में अनुपयोगी प्लास्टिक के उपयोग को लेकर सीआरआइआइ काफी पहले ही मंजूरी दे चुकी है 1 अब अगर इस पर और नए तरीके सें काम किया जा रहा है तो यह एक अच्छो बात है । हा, अभी इसके लिए पूरी व्यवस्था को भी मजबूत बनाना होंगा, प्लास्टिक की उपलब्धता को भी और अधिक बढ़ाना होगा ।

आशीष जैन, अध्यक्ष, इंडियन पाल्यूशन कट्रोल एसोसिएशन

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