अतिथि विद्वानों का भविष्य बनकर रह गया मजाक।

अतिथि विद्वानों का भविष्य मजाक बनकर रह गया :-

‘ रिलोकेशन देकर अचानक कर देते हैं फॉलेन आउट ” प्राचार्य की इच्छा पर छोड़ दिया पद खोलना ‘

सन 2002 से लेकर 2019 तक प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के सरकारी महाविद्यालयों के बच्चों को पढ़ाने के लिए नियमित फैकल्टी उपलब्ध नहीं थी, तब उच्च शिक्षित अतिथि विद्वानों ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के वेतन से भी कम मानदेय में बच्चों का भविष्य संवारा है। इनके लिए 11 सितंबर 2023 को पिछली शिवराज सरकार ने पंचायत करवाई थी। उसके नियम भी अब दिखावटी ही रह गए हैं। क्योंकि पिछले अक्टूबर माह में पीएम कॉलेजों से अतिथि विद्वानों को रिलोकेशन का अवसर दिया था। कुछ को फॉलेन आउट कर दिया गया था। परंतु कुछ ही दिनों के बाद सहायक प्राध्यापक भर्ती 2022 की नियुक्ति से उन्हें फिर अचानक व्यवस्था से बाहर कर दिया।

इस तरह एक ही अतिथि विद्वान को दो से तीन बार फॉलेन आउट कर दिया जाता है। जबकि रिलोकेशन का लाभ एक सत्र में एक बार ही लिया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों के कॉलेजों में आज भी पद खाली पड़े है।वहीं पीएससी से नवीन चयनितों में तो यह स्थिति है कि अगर किसी को अपने घर से दूर का कॉलेज मिल गया तो स्थान संशोधन के लिए भोपाल पहुंच जाते हैं। जिससे अतिथि विद्वानों का रोजगार छीनता जा रहा है। पीएससी में भी 25 प्रतिशत रिजर्वेशन का लाभ एक वर्ष अनुभवी व 25 वर्ष अनुभवी को एक जैसा मिल रहा है। जिससे पुराने अतिथि विद्वान चयनित नहीं हो पाए हैं।इनको फॉलेन आउट का दंश तो मिलता ही है, लेकिन इनके लिए रिक्त पदों को ओपन करने की इच्छा कॉलेज प्राचार्य के पास है। अनेकों प्राचार्यों ने अब तक भरपूर वर्कलोड होने पर भी पद नहीं खोलें हैं। जिससे अतिथि विद्वानों को भटकना पड़ रहा है।

मध्य प्रदेश अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी शंकरलाल खरवाडिया ने इस संबंध में बताया है कि अतिथि विद्वान व्यवस्था को उच्च शिक्षा विभाग ने एक मजाक बनाकर रख दिया है। बार बार हमें फालेन आउट किया जाता है। हमारे बच्चों को हम कब तक अलग-अलग स्थानों पर एडमिशन दिलाएंगे। जबकि वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अतिथि विद्वानों को शासन का अंग घोषित किया था। हमारा भविष्य अंधकार में है। हमें मोहन सरकार हरियाणा की तर्ज पर सुरक्षा प्रदान करें।

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